नई दिल्ली: रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (रॉ) के पूर्व प्रमुख विक्रम सूद ने शुक्रवार को पश्चिम एशिया में जारी तनाव पर भारत के रुख को संतुलित और व्यावहारिक बताया। उनका कहना है कि इस क्षेत्र से जुड़े विवादों और संघर्षों का समाधान बाहरी शक्तियां नहीं, बल्कि वही देश निकाल सकते हैं जो सीधे तौर पर इन परिस्थितियों से जुड़े हैं।
आईएएनएस से बातचीत में सूद ने कहा कि बाहरी देशों को क्षेत्रीय मुद्दों में जरूरत से ज्यादा हस्तक्षेप करने से बचना चाहिए। उनके मुताबिक, भारत इस मामले में समझदारी से कदम उठा रहा है और पश्चिम एशिया के जटिल मुद्दों को सुलझाने की जिम्मेदारी वहीं के देशों और लोगों पर ही छोड़ रहा है। उन्होंने कहा कि अनावश्यक दखल से हालात बेहतर होने के बजाय और उलझ सकते हैं।
सूद ने यह भी कहा कि खुफिया तंत्र और उसकी रणनीति को लेकर दीर्घकालिक सोच बेहद जरूरी होती है। उनका मानना है कि बदलती तकनीकों के दौर में वैश्विक सुरक्षा की चुनौतियां लगातार बढ़ रही हैं, इसलिए खुफिया एजेंसियों को आने वाले वर्षों के लिए खुद को तैयार रखना होगा।
उन्होंने कहा कि खुफिया रणनीति पर केवल सतही चर्चा से काम नहीं चलता। एजेंसियों को इस तरह विकसित करना जरूरी है कि वे आने वाले 20 वर्षों तक भी प्रभावी और प्रासंगिक बनी रहें। साथ ही सरकारों को यह भी तय करना होगा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और नई तकनीकों का इस्तेमाल सुरक्षा तंत्र में किस तरह किया जाए।
पूर्व रॉ प्रमुख ने वैश्विक शक्ति संतुलन में हो रहे बदलावों की ओर भी ध्यान दिलाया। उनके मुताबिक, दुनिया की एक प्रमुख महाशक्ति का प्रभाव धीरे-धीरे कम होता दिखाई दे रहा है, जिससे अंतरराष्ट्रीय संबंधों में अस्थिरता बढ़ सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि चीन के साथ भारत के संबंध फिलहाल सबसे बेहतर स्थिति में नहीं हैं, जो आने वाले समय में चुनौतियां पैदा कर सकते हैं।
इसके अलावा, भारत के प्रमुख भू-राजनीतिक और भू-आर्थिक मंच रायसीना डायलॉग पर बोलते हुए सूद ने इसे देश के महत्वपूर्ण रणनीतिक संवादों में से एक बताया। उनका कहना था कि इस मंच पर वैश्विक और भविष्य से जुड़े अहम मुद्दों पर चर्चा होती है, जिसका दायरा काफी व्यापक है। उन्होंने इस आयोजन को सकारात्मक पहल बताते हुए कहा कि यह अच्छा है कि लोग इस संवाद में रुचि ले रहे हैं।