विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भारत और जापान के बीच विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी को न केवल द्विपक्षीय संबंधों के लिहाज से बल्कि वैश्विक और क्षेत्रीय संतुलन के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि इस साझेदारी का प्रभाव व्यापक है और यह हिंद-प्रशांत क्षेत्र सहित वैश्विक घटनाक्रमों को दिशा देने में अहम भूमिका निभा सकती है।

जापान के विदेश मंत्री मोतेगी तोशिमित्सु की दो दिवसीय भारत यात्रा के दौरान हुई बैठक में जयशंकर ने कहा कि दोनों देशों के संबंध पारंपरिक कूटनीति से आगे बढ़कर अब रणनीतिक सहयोग के एक मजबूत ढांचे में बदल चुके हैं। उन्होंने कहा कि भारत और जापान मिलकर स्वतंत्र और खुले हिंद-प्रशांत क्षेत्र को मजबूत करने की दिशा में काम कर रहे हैं।

उन्होंने आने वाली क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक का भी उल्लेख किया, जिसकी अध्यक्षता वे स्वयं करेंगे। इस बैठक में भारत, जापान, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया के विदेश मंत्री शामिल होंगे और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा की जाएगी।

जयशंकर ने कहा कि भारत और जापान दोनों ही बड़े ऊर्जा आयातक और व्यापारिक अर्थव्यवस्थाएं हैं, इसलिए समुद्री सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता उनके साझा हितों से जुड़ी हुई है। उन्होंने पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति और महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में उत्पन्न चुनौतियों का भी जिक्र किया, जिनके कारण यह सहयोग और अधिक महत्वपूर्ण हो जाता है।

बैठक के दौरान उन्होंने आर्थिक सुरक्षा के मुद्दे को भी उठाया और कहा कि आज वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं के लिए यह एक प्रमुख चिंता का विषय बन चुका है।

जापान के विदेश मंत्री ने भी इस अवसर पर कहा कि बदलते वैश्विक हालात में भारत और जापान को हिंद-प्रशांत क्षेत्र में एक प्रमुख शक्ति के रूप में साथ मिलकर काम करना चाहिए। उन्होंने कहा कि टोक्यो की स्वतंत्र और खुले हिंद-प्रशांत (FOIP) पहल का उद्देश्य क्षेत्र के देशों को अधिक मजबूत, आत्मनिर्भर और सहयोगी बनाना है।

दोनों देशों ने इस बात पर सहमति जताई कि भविष्य में द्विपक्षीय सहयोग को और विस्तार दिया जाएगा और क्वाड जैसे मंचों के जरिए क्षेत्रीय स्थिरता को मजबूती दी जाएगी।