दिल्ली। लोकसभा में सत्ताधारी और विपक्षी दलों के बीच गतिरोध जारी है, और अब यह विवाद महिला सांसदों तक पहुंच गया है। सोमवार को विपक्ष की महिला सांसदों ने स्पीकर को पत्र लिखकर निलंबन पर नाराजगी जताई थी। इसके जवाब में भाजपा की महिला सांसदों ने भी स्पीकर को पत्र भेजकर विपक्षी सांसदों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

भाजपा सांसदों का पत्र और मांगें
भाजपा की महिला सांसदों ने पत्र में लिखा कि 4 फरवरी को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान लोकसभा में जो घटनाएं हुईं, वे बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और खेदजनक थीं। उन्होंने कहा कि कुछ विपक्षी महिला सांसदों ने सदन की मर्यादा को चुनौती दी और प्रधानमंत्री की सीट के पास जाकर हंगामा किया, साथ ही स्पीकर की मेज की ओर कागज फेंके।

पत्र में भाजपा सांसदों ने स्पीकर से अपील की कि लोकतांत्रिक संस्थानों को कलंकित करने वाले इस तरह के व्यवहार के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। उन्होंने स्पीकर की कार्यवाही की प्रशंसा करते हुए कहा कि उन्होंने सदन की गरिमा और पवित्रता को बनाए रखा।

मामला क्या है
दरअसल, 4 फरवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का लोकसभा में संबोधन होना था, लेकिन सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए स्पीकर ओम बिरला ने भाषण टाल दिया। बैठक शुरू होते ही विपक्षी सांसदों ने हंगामा शुरू कर दिया। कांग्रेस की कुछ महिला सांसद समेत आठ से दस सांसद पीएम की सीट के पास बैनर लेकर पहुंच गईं, जिससे सदन की कार्यवाही बाधित हो गई और स्पीकर ने बैठक स्थगित कर दी।

अगले दिन 5 फरवरी को स्पीकर ने कहा कि 4 फरवरी का माहौल पूरी तरह असामान्य था और संसद की गरिमा के विपरीत था।

विपक्षी महिला सांसदों की प्रतिक्रिया
वहीं, विपक्ष की महिला सांसदों ने पत्र में आरोप लगाया कि स्पीकर विपक्ष, खासकर कांग्रेस सांसदों के खिलाफ बेबुनियाद और अपमानजनक कार्रवाई कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि संसद में सभी सांसदों की गरिमा की सुरक्षा होनी चाहिए और निष्पक्षता बरती जानी चाहिए। उनका आरोप है कि चार दिन बीत जाने के बावजूद नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को बोलने की अनुमति नहीं दी गई, जबकि आठ विपक्षी सांसदों को निलंबित कर दिया गया।

सांसदों ने लिखा कि पीएम मोदी के खिलाफ संविधानिक तरीके से विरोध करने के लिए विपक्ष के सांसदों को निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि वे पहली पीढ़ी की नेता हैं और दशकों की मेहनत और संघर्ष के बाद राजनीति में अपनी जगह बनाई है। ऐसे में उनके सत्यनिष्ठा और अधिकारों पर हमला हर उस महिला सांसद पर हमला है, जो गरिमा और साहस के साथ राजनीति में अपने कदम बढ़ाना चाहती है।