भारतीय नौसेना का इंजन रहित पारंपरिक समुद्री पोत आईएनएसवी कौंडिन्य सोमवार को अपनी पहली अंतरराष्ट्रीय समुद्री यात्रा पर गुजरात के पोरबंदर से ओमान की राजधानी मस्कट के लिए रवाना हुआ। यह विशेष जहाज प्राचीन ‘सिलाई तकनीक’ से निर्मित है और इसका स्वरूप पांचवीं शताब्दी के ऐतिहासिक जहाजों से प्रेरित है।

इस पोत को तैयार करने की प्रेरणा महाराष्ट्र की अजंता गुफाओं में अंकित एक प्राचीन चित्र से मिली थी, जिसमें पुराने समय के समुद्री जहाजों की झलक मिलती है। यह यात्रा भारत की प्राचीन समुद्री परंपराओं और नौवहन कौशल को वैश्विक मंच पर फिर से उजागर करने का प्रयास है।

पौराणिक नाविक के नाम पर रखा गया है जहाज

इस जहाज का नाम पौराणिक नाविक कौंडिन्य के नाम पर रखा गया है, जिनके बारे में मान्यता है कि उन्होंने प्राचीन काल में भारत से दक्षिण-पूर्व एशिया तक समुद्री यात्रा की थी। आईएनएसवी कौंडिन्य भारत के एक समुद्री राष्ट्र के रूप में ऐतिहासिक योगदान का प्रतीक माना जा रहा है।

अरब सागर को पार करते हुए यह जहाज लगभग 1,400 किलोमीटर की दूरी तय कर मस्कट पहुंचेगा। यह अभियान उन प्राचीन समुद्री व्यापारिक मार्गों को फिर से स्मरण कराता है, जिनके माध्यम से भारत और ओमान के बीच सदियों तक व्यापार और सांस्कृतिक संपर्क बना रहा।

कारवार में हुआ था औपचारिक कमीशनिंग

भारतीय नौसेना ने 21 मई को कारवार स्थित नौसेना अड्डे पर आयोजित एक समारोह में इस पोत को औपचारिक रूप से नौसेना में शामिल किया था। इस अवसर पर केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत भी उपस्थित रहे। कमीशनिंग के बाद इसे भारतीय नौसेना नौकायन पोत (आईएनएसवी) कौंडिन्य का नाम दिया गया।

17 सदस्यीय दल कर रहा है अभियान का नेतृत्व

नौसेना के अनुसार, यह पोत उन्हीं पारंपरिक समुद्री मार्गों से गुजरेगा जो कभी भारत के पश्चिमी तट को ओमान से जोड़ते थे और जिनसे हिंद महासागर क्षेत्र में व्यापार व सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा मिलता था।

लगभग 19.6 मीटर लंबा और 6.5 मीटर चौड़ा यह जहाज 17 सदस्यीय दल के साथ समुद्र में उतरा है। दल में चार अधिकारी और 13 नौसैनिक शामिल हैं। जहाज की कमान कमांडर विकास शेरोन संभाल रहे हैं, जबकि पूरे अभियान का नेतृत्व कमांडर वाई. हेमंत कुमार कर रहे हैं।

पारंपरिक तकनीक से हुआ निर्माण

आईएनएसवी कौंडिन्य का निर्माण सितंबर 2023 में मास्टर शिपराइट बाबू शंकरन के नेतृत्व में किया गया था। कारीगरों की टीम ने लकड़ी के तख्तों को जोड़ने के लिए नारियल के रेशों से बनी रस्सियों, प्राकृतिक रेजिन और पारंपरिक सामग्री का इस्तेमाल किया। यह जहाज फरवरी 2025 में गोवा के होडी शिपयार्ड में समुद्र में उतारा गया।

प्रधानमंत्री ने जताई प्रसन्नता

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘एक्स’ पर साझा संदेश में आईएनएसवी कौंडिन्य की पहली अंतरराष्ट्रीय यात्रा पर खुशी जताई। उन्होंने कहा कि यह अभियान खाड़ी क्षेत्र और उससे आगे भारत के ऐतिहासिक समुद्री संबंधों को नई ऊर्जा देगा। प्रधानमंत्री ने चालक दल को सुरक्षित और यादगार यात्रा के लिए शुभकामनाएं भी दीं।