नई दिल्ली। देश में NEET-UG परीक्षा से जुड़ा विवाद एक बार फिर राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है। पेपर लीक प्रकरण के बाद 21 जून को आयोजित री-एग्जाम के दौरान बेंगलुरु में हुए घटनाक्रम ने परीक्षा व्यवस्था और राजनीति को आमने-सामने ला खड़ा किया है।
एक ओर लाखों छात्र अपने मेडिकल करियर के सपने को साकार करने के लिए परीक्षा देने पहुंचे थे, वहीं दूसरी ओर शहर में हुई एक राजनीतिक रैली के चलते ट्रैफिक जाम की स्थिति ने कई छात्रों और अभिभावकों की मुश्किलें बढ़ा दीं।
बेंगलुरु में क्या हुआ?
जानकारी के अनुसार, NEET-UG री-टेस्ट के दिन बेंगलुरु में एक सत्ताधारी दल की राजनीतिक रैली आयोजित थी। इसी दौरान शहर के कई प्रमुख मार्गों पर भारी ट्रैफिक जाम लग गया। परीक्षा दोपहर 2 बजे शुरू होनी थी, जबकि छात्रों को 1:30 बजे तक परीक्षा केंद्र पहुंचना अनिवार्य था।
जाम के कारण कुछ छात्र समय पर केंद्र नहीं पहुंच सके। बताया जा रहा है कि कम से कम तीन छात्र गेट बंद होने के बाद परीक्षा केंद्र पहुंचे और अंदर प्रवेश नहीं कर पाए। उन्होंने प्रवेश की कोशिश भी की, लेकिन नियमों के कारण अनुमति नहीं दी गई।
अभिभावकों का गुस्सा
घटना के बाद छात्रों और उनके अभिभावकों में नाराजगी देखने को मिली। कई माता-पिता ने आरोप लगाया कि राजनीतिक कार्यक्रम के कारण सड़कें अवरुद्ध रहीं, जिससे छात्रों की परीक्षा प्रभावित हुई।
एक अभिभावक ने बताया कि सामान्य दिनों में 15–20 मिनट में तय होने वाला सफर उस दिन 30–40 मिनट से अधिक समय ले गया। उन्होंने कहा कि इस तरह की रैलियों को परीक्षा जैसे महत्वपूर्ण दिन से बचकर आयोजित किया जाना चाहिए।
कुछ अभिभावकों ने यह भी सवाल उठाया कि जब पूरे देश में परीक्षा का दिन पहले से तय था, तो उसी दिन शहर के बीचों-बीच रैली क्यों रखी गई।
राजनीतिक बयानबाज़ी तेज
मामले के सामने आने के बाद राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप शुरू हो गए हैं। भाजपा नेताओं ने इसे छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ बताते हुए सरकार पर सवाल उठाए हैं। वहीं, कुछ नेताओं ने सोशल मीडिया पर प्रभावित परिवारों के वीडियो साझा कर नाराजगी जताई।
कांग्रेस का जवाब
दूसरी ओर, कांग्रेस ने आरोपों को खारिज करते हुए इसे राजनीतिक रूप से बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया मुद्दा बताया है। राज्य सरकार के मंत्रियों का कहना है कि परीक्षा के दिन ट्रैफिक को लेकर एडवाइजरी जारी की गई थी और वैकल्पिक व्यवस्था भी की गई थी।
सरकारी पक्ष ने यह भी दावा किया कि जिन छात्रों को परेशानी हुई, उनके मामले अलग-अलग कारणों से जुड़े थे, केवल ट्रैफिक ही वजह नहीं थी।
मुद्दा फिर गरमाया
NEET परीक्षा को लेकर पहले से ही पेपर लीक विवाद और सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठते रहे हैं। अब बेंगलुरु की यह घटना एक बार फिर परीक्षा प्रणाली और प्रशासनिक समन्वय पर बहस को तेज कर रही है।