नई दिल्ली: भारत में ईंधन और गैस की आपूर्ति पर पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध का असर पड़ रहा है, लेकिन सरकार ने सुनिश्चित किया है कि देशवासियों को किसी प्रकार की कमी का सामना न करना पड़े। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने कहा कि कच्चे तेल, एलपीजी और एलएनजी की आपूर्ति प्रभावित हुई है, जबकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में इनकी कीमतें भी बढ़ गई हैं।
सुजाता शर्मा ने अंतर-मंत्रालयी प्रेसवार्ता में बताया, "हमने इस स्थिति का प्रबंधन करने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। हमारे पास पर्याप्त कच्चा तेल भंडार मौजूद है और आने वाले दो महीनों के लिए आपूर्ति पूरी तरह सुरक्षित है। एलपीजी और पीएनजी की स्थिति भी अनुकूल है।"
घरेलू उत्पादन में बढ़ोतरी
सरकार ने कहा कि रिफाइनरियां अपनी पूरी क्षमता या उससे भी अधिक क्षमता से चल रही हैं। घरेलू एलपीजी उत्पादन में लगभग 40% की वृद्धि हुई है। उन्होंने बताया कि चूंकि भारत आयात पर अत्यधिक निर्भर है और एलपीजी आयात का लगभग 90% होर्मुज जलडमरूमध्य से आता है, इसलिए प्राथमिकता घरेलू उपभोक्ताओं को दी गई। शुरुआत में वाणिज्यिक आपूर्ति कम की गई थी, लेकिन अब धीरे-धीरे इसे बढ़ाकर 70% कर दिया गया है। 14 मार्च से अब तक 30,000 टन व्यावसायिक एलपीजी वितरित की जा चुकी है।
प्रवासी श्रमिकों और छोटे व्यवसायों को प्राथमिकता
सुजाता शर्मा ने बताया कि सरकार ने रेस्तरां, सड़क किनारे के ढाबे, होटलों, औद्योगिक कैंटीन और प्रवासी श्रमिकों को विशेष प्राथमिकता दी है। लगभग 30,000 छोटे पांच किलो के सिलिंडर प्रवासी श्रमिकों तक पहुंचाए गए। इसके अलावा इस्पात, ऑटोमोबाइल, वस्त्र, रंग, रसायन और प्लास्टिक उद्योगों को भी आपूर्ति में प्राथमिकता दी गई है।
कीमतों पर नियंत्रण
हालांकि वैश्विक कच्चे तेल की कीमतें लगभग 70 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 100 डॉलर से अधिक हो गई हैं, लेकिन भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतें स्थिर रखी गई हैं। मंत्रालय ने भरोसा दिलाया कि अफवाहों और पेट्रोल पंपों पर कतारों के बावजूद देश में ईंधन की कमी नहीं है।
सुजाता शर्मा ने कहा, "हमारे पड़ोसी देशों के विपरीत, जहां ईंधन की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं, भारत में उपभोक्ताओं के लिए ईंधन उपलब्धता और कीमत नियंत्रण सुनिश्चित किया गया है। सरकार लगातार स्थिति की निगरानी कर रही है और समय पर कदम उठाए जा रहे हैं।"