अमेरिका और ईरान के बीच हाल ही में हुई शांति वार्ता के बिना किसी नतीजे पर पहुंचने के बाद इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का बड़ा बयान सामने आया है। उन्होंने कहा कि ईरान के खिलाफ चलाया गया अभियान उसके परमाणु और बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रमों को गंभीर रूप से प्रभावित करने में सफल रहा है।
नेतन्याहू का सख्त बयान
प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने कहा कि यह अभियान अभी समाप्त नहीं हुआ है, लेकिन इसके परिणाम अब तक “ऐतिहासिक” हैं। उन्होंने दावा किया कि ईरान लंबे समय से इस क्षेत्र में इजरायल को घेरने की कोशिश कर रहा था।
उन्होंने कहा कि गाजा में हमास, लेबनान में हिजबुल्लाह, सीरिया में असद शासन, इराक में मिलिशिया और यमन में हूती जैसे संगठनों के जरिए इजरायल पर दबाव बनाने की कोशिश की गई।
नेतन्याहू ने आगे कहा कि “ईरान हमें कमजोर करना चाहता था, लेकिन स्थिति अब बदल चुकी है और वही खुद मुश्किलों का सामना कर रहा है।”
अमेरिका-ईरान वार्ता फिर विफल
शनिवार को पाकिस्तान में हुई अमेरिका और ईरान की उच्च स्तरीय बातचीत भी किसी समझौते पर नहीं पहुंच सकी। इसके बाद अमेरिकी पक्ष ने वार्ता समाप्त करने की घोषणा की।
अमेरिकी प्रतिनिधि जेडी वेंस ने कहा कि बातचीत के दौरान रेड लाइन्स और शर्तों को स्पष्ट किया गया था, लेकिन ईरान ने उन पर सहमति नहीं जताई, जिसके चलते कोई समझौता संभव नहीं हो सका।
ईरान ने अमेरिका पर लगाए आरोप
ईरान ने वार्ता विफल होने का कारण अमेरिका की “अवास्तविक और अनुचित मांगों” को बताया है। ईरानी सरकारी मीडिया IRIB के अनुसार, ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने कई प्रस्ताव रखे, लेकिन अमेरिकी पक्ष की जिद के कारण बातचीत आगे नहीं बढ़ सकी।