हैदराबाद। केंद्रीय मंत्री बंदी संजय कुमार के बेटे बंदी भगीरथ ने शनिवार को पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब पॉक्सो मामले में हाईकोर्ट से अंतरिम राहत नहीं मिली थी और उनके विदेश भागने की आशंका के चलते साइबराबाद पुलिस ने उनके खिलाफ लुक आउट सर्कुलर (LOC) जारी किया था।

पुलिस के अनुसार, आत्मसमर्पण से पहले भगीरथ की गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी की जा रही थी। हाईकोर्ट द्वारा राहत याचिका खारिज किए जाने के एक दिन बाद उन्होंने खुद को जांच एजेंसी के हवाले कर दिया।

पिता बोले- कानून का सम्मान सर्वोपरि

आत्मसमर्पण के बाद केंद्रीय मंत्री बंदी संजय कुमार ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके परिवार ने कानून और न्याय व्यवस्था का सम्मान करते हुए यह निर्णय लिया है। उन्होंने बताया कि कानूनी सलाह के बाद भगीरथ को जांच में सहयोग के लिए पुलिस के सामने पेश होने की सलाह दी गई थी।

उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा कि कानून की नजर में सभी समान हैं और जांच प्रक्रिया का पूरा सम्मान किया जाना चाहिए। संजय कुमार ने यह भी कहा कि उन्हें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है और मामला कानूनी प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ेगा।

जांच में सहयोग की बात

केंद्रीय मंत्री के अनुसार, शुरुआत में कानूनी टीम का मानना था कि भगीरथ को जमानत मिल सकती है, जिसके कारण पुलिस के सामने पेश होने में देरी हुई। हालांकि बाद में सभी साक्ष्यों और परिस्थितियों को देखते हुए जांच में सहयोग करने का निर्णय लिया गया।

क्या है मामला

यह मामला 17 वर्षीय नाबालिग की मां द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत से जुड़ा है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि बंदी भगीरथ का पीड़िता से संबंध था और उसके साथ यौन उत्पीड़न की घटना हुई। शिकायत के आधार पर 8 मई को बीएनएस और पॉक्सो एक्ट की धाराओं में केस दर्ज किया गया था।

पीड़िता के बयान के बाद पुलिस ने मामले में पॉक्सो एक्ट की और सख्त धाराएं भी जोड़ी थीं। फिलहाल मामले की जांच जारी है और आरोपी को आगे की कानूनी प्रक्रिया के तहत पेश किया जाएगा।