पश्चिम बंगाल की फलता विधानसभा सीट पर पुनर्मतदान कड़े सुरक्षा इंतजामों के बीच जारी है। सुबह से ही बड़ी संख्या में मतदाता मतदान केंद्रों पर पहुंचकर अपने मताधिकार का प्रयोग कर रहे हैं। चुनाव आयोग ने इस बार सुरक्षा व्यवस्था को पहले की तुलना में और अधिक मजबूत कर दिया है।
सुबह से जारी वोटिंग, बढ़ा मतदान प्रतिशत
चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार, पुनर्मतदान में सुबह से ही मतदान में तेजी देखी गई। शुरुआती घंटों में लगभग 20 प्रतिशत वोटिंग दर्ज की गई थी, जो दोपहर तक बढ़कर 60 प्रतिशत से अधिक पहुंच गई। मतदान प्रक्रिया शांतिपूर्ण तरीके से आगे बढ़ रही है।
क्यों हो रहा है दोबारा मतदान?
फलता विधानसभा क्षेत्र में 29 अप्रैल को मतदान हुआ था, लेकिन उस दौरान गड़बड़ी के आरोप सामने आने के बाद चुनाव आयोग ने कुछ बूथों पर पुनर्मतदान कराने का फैसला लिया। जांच के बाद कई मतदान केंद्रों पर अनियमितताओं की पुष्टि होने पर यह कदम उठाया गया।
कड़ी सुरक्षा व्यवस्था
इस पुनर्मतदान के लिए केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) की 35 कंपनियां तैनात की गई हैं। प्रत्येक बूथ पर सुरक्षा बलों की मौजूदगी सुनिश्चित की गई है। इसके अलावा 30 क्विक रिस्पॉन्स टीमें (QRT) किसी भी स्थिति से निपटने के लिए तैयार रखी गई हैं।
मतदाताओं का अनुभव
मतदान केंद्रों पर पहुंचे कई मतदाताओं ने कहा कि अब माहौल पहले की तुलना में अधिक सुरक्षित और शांतिपूर्ण है। लोगों का कहना है कि वे बिना किसी डर के अपने वोट डाल पा रहे हैं, जो पिछले वर्षों की तुलना में बड़ा बदलाव है।
राजनीतिक बयानबाजी
फलता सीट से बीजेपी उम्मीदवार देबांग्शु पांडा ने कहा कि मतदान शांतिपूर्ण तरीके से हो रहा है और माहौल उत्सव जैसा है। उन्होंने दावा किया कि मतदाता बड़ी संख्या में बीजेपी के पक्ष में वोट कर रहे हैं।
वहीं, तृणमूल कांग्रेस के प्रत्याशी जहांगीर खान ने पुनर्मतदान से ठीक पहले चुनावी मैदान छोड़ने की घोषणा कर दी थी। हालांकि, नामांकन प्रक्रिया पूरी न होने के कारण उनका नाम ईवीएम में बरकरार रहा।
चुनाव से हटने का मामला
जहांगीर खान ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था कि वह अब चुनाव नहीं लड़ेंगे, लेकिन उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि यह निर्णय पार्टी नेतृत्व के निर्देश पर लिया गया है या नहीं।
पुनर्मतदान का कारण
चुनाव आयोग की जांच में सामने आया था कि कुछ बूथों पर ईवीएम से छेड़छाड़ और मतदान प्रक्रिया में अनियमितताओं के संकेत मिले थे। इसके अलावा वेबकैम फुटेज में भी गड़बड़ी की आशंका जताई गई थी, जिसके बाद पुनर्मतदान का निर्णय लिया गया।
आगे की प्रक्रिया
चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि मतदान प्रक्रिया पर पूरी नजर रखी जा रही है और किसी भी तरह की गड़बड़ी को रोकने के लिए सख्त कदम उठाए गए हैं।