सुल्तानपुर। कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के खिलाफ चल रहे मानहानि मामले में एक नया कानूनी मोड़ सामने आया है। भाजपा नेता विजय मिश्र की ओर से निचली अदालत के एक आदेश को चुनौती देते हुए सत्र न्यायालय में निगरानी याचिका (रिवीजन) दाखिल की गई है।
राहुल गांधी की ओर से अधिवक्ता काशी प्रसाद शुक्ला ने जानकारी देते हुए बताया कि परिवादी पक्ष ने उस आदेश के खिलाफ याचिका दायर की है, जिसमें अदालत ने साक्ष्य के तौर पर कुछ सैंपल लिए जाने की मांग को खारिज कर दिया था। यह रिवीजन याचिका वर्तमान में एडीजे पंचम की अदालत में विचाराधीन है।
अगली सुनवाई 17 जून को
अदालत ने इस मामले में अगली सुनवाई के लिए 30 मई 2026 की तारीख तय की है और संबंधित केस फाइल भी तलब की गई है। वहीं, मूल मानहानि मुकदमे की अगली सुनवाई 17 जून को होनी है। यह पूरी कानूनी प्रक्रिया 2 मई के उस आदेश से जुड़ी है, जिसमें सैंपल लेने संबंधी प्रार्थना पत्र को खारिज कर दिया गया था।
परिवादी पक्ष के अधिवक्ता संतोष पांडेय ने बताया कि आदेश की सत्य प्रतिलिपि प्राप्त न होने के कारण रिवीजन दाखिल करने में देरी हुई, जिसके चलते उन्होंने अदालत से समय की मांग की थी।
यह मानहानि मामला वर्ष 2018 में भाजपा नेता विजय मिश्र द्वारा दर्ज कराया गया था। मामले में राहुल गांधी ने 20 फरवरी 2024 को अदालत में आत्मसमर्पण किया था, जिसके बाद विशेष मजिस्ट्रेट ने उन्हें 25-25 हजार रुपये के दो मुचलकों पर जमानत प्रदान की थी।
कोर्ट में बयान और कार्यवाही
राहुल गांधी ने 26 जुलाई 2024 को एमपी/एमएलए कोर्ट में उपस्थित होकर अपना बयान दर्ज कराया था। इस दौरान उन्होंने खुद को निर्दोष बताते हुए मामले को राजनीतिक साजिश करार दिया था। इसके बाद अदालत ने वादी पक्ष को अपने साक्ष्य प्रस्तुत करने के निर्देश दिए थे, जिसके तहत लगातार गवाहों की पेशी जारी है।
इससे पहले 20 फरवरी को भी राहुल गांधी ने सीआरपीसी की धारा 313 के तहत अपना बयान दर्ज कराया था। हालांकि, उनके अधिवक्ता की ओर से अदालत में कोई अतिरिक्त स्पष्टीकरण या साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया था।