कर्नाटक के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के कुछ ही घंटों बाद सिद्धरमैया ने साफ संकेत दे दिए कि वह फिलहाल राष्ट्रीय राजनीति में जाने के इच्छुक नहीं हैं। उन्होंने राज्यसभा जाने के प्रस्ताव को ठुकराते हुए कहा कि वह कर्नाटक की सक्रिय राजनीति में विधायक के तौर पर अपनी भूमिका जारी रखेंगे।

सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस नेतृत्व ने डी.के. शिवकुमार को अगला मुख्यमंत्री बनाने का प्रस्ताव रखा था, जिस पर सिद्धरमैया ने सहमति जता दी। गुरुवार सुबह वरिष्ठ मंत्रियों के साथ हुई बैठक में उन्होंने इस फैसले की जानकारी भी साझा की थी।

राज्यसभा जाने से किया इनकार

शाम तक यह भी स्पष्ट हो गया कि सिद्धरमैया ने पार्टी हाईकमान की ओर से दिए गए राज्यसभा प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया। 80 वर्षीय नेता ने कहा कि उन्हें राष्ट्रीय राजनीति में कोई विशेष रुचि नहीं है और वह राज्य स्तर पर सक्रिय रहना चाहते हैं।

उन्होंने कहा, “पार्टी नेतृत्व ने मुझे राज्यसभा जाने का सुझाव दिया था, लेकिन मैंने मना कर दिया। मैं कर्नाटक की राजनीति में ही सक्रिय रहूंगा।”

लंबे समय तक बनाए रखी राजनीतिक पकड़

पिछले एक वर्ष के दौरान सिद्धरमैया ने मुख्यमंत्री पद पर अपनी मजबूत पकड़ बनाए रखी, जबकि पार्टी के भीतर नेतृत्व परिवर्तन को लेकर लगातार चर्चाएं चलती रहीं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि कांग्रेस नेतृत्व ने दक्षिण भारत, खासकर तमिलनाडु और केरल की राजनीतिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए इस बदलाव को फिलहाल टाल रखा था।

बताया जा रहा है कि पार्टी को उम्मीद थी कि सिद्धरमैया का ‘अहिंदा’ सामाजिक समीकरण दक्षिण भारतीय राज्यों में कांग्रेस को राजनीतिक फायदा पहुंचा सकता है।

राहुल गांधी के साथ हुई अहम बैठक

सूत्रों के मुताबिक, मंगलवार को राहुल गांधी और सिद्धरमैया के बीच करीब 35 मिनट तक निजी बातचीत हुई थी। इसी बैठक में भविष्य की राजनीतिक रणनीति पर चर्चा हुई और उन्हें राज्यसभा सीट का विकल्प भी दिया गया।

कांग्रेस नेतृत्व की ओर से यह संदेश दिया गया कि अब पार्टी को 2028 के कर्नाटक विधानसभा चुनाव और 2029 के लोकसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए आगे की रणनीति तय करनी होगी। हालांकि, सिद्धरमैया ने फिलहाल राज्य राजनीति में बने रहने का फैसला किया है।