लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी चुनाव प्रचार के लिए असम पहुंचे और कार्बी आंगलोंग में आयोजित रैली को संबोधित किया। रैली में उन्होंने असम को "फूलों का गुलदस्ता" बताते हुए कहा कि यहाँ विभिन्न धर्म, जाति और विचारधारा के लोग एक साथ रहते हैं।
राहुल गांधी ने कांग्रेस की सोच को बताते हुए कहा कि पार्टी का मानना है कि देश की असली ताकत जनता के हाथ में हो, और हर वर्ग को देश के प्रशासन और विकास में हिस्सेदारी मिले। इसके विपरीत, उन्होंने भाजपा पर आरोप लगाया कि उसकी सोच असम को दिल्ली से नियंत्रित करने की है। राहुल के अनुसार, यही वर्तमान लड़ाई की असल जंग है।
उन्होंने अनुच्छेद 244ए का हवाला देते हुए कहा कि यह इसलिए लागू किया गया ताकि स्थानीय स्तर पर निर्णय लिए जा सकें, न कि गुवाहाटी या दिल्ली से। “यह फर्क हमारे और उनकी सोच का है,” उन्होंने जोर देकर कहा।
राहुल गांधी ने मोदी सरकार पर किसानों और जमीनों को लेकर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि कई बीघा जमीन बड़ी कंपनियों को दी गई है, जैसे अडानी, अंबानी और पतंजलि, जिससे आम लोगों और किसानों को नुकसान हुआ है। उन्होंने अमेरिका-भारत समझौते का जिक्र करते हुए कहा कि इसके कारण भारत की खेती और किसानों की सुरक्षा पर असर पड़ा है।
इसके अलावा, उन्होंने आरोप लगाया कि अगर भारत रूस, ईरान या इराक से तेल खरीदना चाहता है, तो उसे अमेरिका की अनुमति लेनी पड़ती है। उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी ने भारत का महत्वपूर्ण डेटा अमेरिका को सौंप दिया, और अमेरिकी कंपनियों के लिए भारत हर साल 9 लाख करोड़ रुपये का सामान खरीदेगा। राहुल गांधी के अनुसार, इससे छोटे उद्योग और कारोबार प्रभावित होंगे, टैक्स बढ़े हैं और भारत के विकल्प सीमित हुए हैं।
रैली में राहुल गांधी ने यह भी कहा कि यह सब इसलिए हुआ क्योंकि डोनाल्ड ट्रंप नरेंद्र मोदी को नियंत्रित कर रहे हैं, और यही वजह है कि भारत पर फैसले विदेशी दबाव में लिए जा रहे हैं।