पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के परिणाम सामने आने के बाद राज्य के कई हिस्सों में राजनीतिक तनाव हिंसा में बदल गया है। नतीजे घोषित होने के बाद अलग-अलग इलाकों से आगजनी, तोड़फोड़ और झड़पों की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। कुछ जगहों पर हालात इतने बिगड़ गए कि मूर्तियों और राजनीतिक कार्यालयों को भी नुकसान पहुंचाया गया। स्थिति को देखते हुए प्रशासन अलर्ट पर है और चुनाव आयोग ने सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।

सबसे ज्यादा प्रभावित इलाकों में आसनसोल, कोलकाता, न्यू टाउन और बीरभूम शामिल हैं, जहां हिंसक घटनाएं दर्ज की गई हैं। मंगलवार को हुई झड़पों में भाजपा और तृणमूल कांग्रेस के एक-एक कार्यकर्ता की मौत की भी खबर है। न्यू टाउन में एक राजनीतिक रैली के दौरान विवाद के बाद भाजपा कार्यकर्ता की जान चली गई, जबकि बीरभूम के नानूर क्षेत्र में टीएमसी कार्यकर्ता की हत्या का आरोप सामने आया है।

कई जगह दफ्तरों में आगजनी और तोड़फोड़
आसनसोल उत्तर के कोर्ट मोड़ इलाके में टीएमसी पार्षद के कार्यालय को देर रात आग के हवाले कर दिया गया, जिससे पूरा कार्यालय जलकर नष्ट हो गया। आसपास की दुकानों को भी नुकसान पहुंचा है। वहीं कोलकाता के कसबा और टॉलीगंज क्षेत्रों में भी राजनीतिक झंडों के साथ भीड़ ने कई दफ्तरों में तोड़फोड़ की। सिलीगुड़ी से भी एक टीएमसी कार्यालय में आगजनी का वीडियो सामने आया है, जिससे कानून-व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।

टीएमसी और भाजपा में आरोप-प्रत्यारोप तेज
हिंसा को लेकर दोनों प्रमुख दल एक-दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं। टीएमसी नेताओं का कहना है कि चुनाव परिणामों के बाद भाजपा समर्थक हिंसक घटनाओं में शामिल हैं और उनके कार्यकर्ताओं को निशाना बनाया जा रहा है। वहीं भाजपा नेताओं ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि यह घटनाएं टीएमसी के भीतर असंतोष और गुटबाजी का परिणाम हैं।

चुनाव आयोग ने दिए सख्त निर्देश
बढ़ती हिंसा को गंभीरता से लेते हुए चुनाव आयोग ने राज्य प्रशासन को कड़े निर्देश जारी किए हैं। मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक और केंद्रीय सुरक्षा बलों को तुरंत स्थिति नियंत्रण में लेने को कहा गया है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि हिंसा फैलाने वालों के खिलाफ बिना किसी भेदभाव के सख्त कार्रवाई की जाए और ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति अपनाई जाए, चाहे वे किसी भी राजनीतिक दल से जुड़े हों।