महाराष्ट्र के किसानों पर सूखे की दोहरी मार, फसल बर्बाद और 92 गांवों में पानी का संकट

HIGHLIGHTS
- जून में बारिश नहीं हुई, जबकि जुलाई की फुहारों के बाद किसानों ने बुआई की थी।
- बारिश और तेज गर्मी से खेतों की मिट्टी की नमी खत्म हो गई है।
- अक्टूबर में सोलापुर का तापमान 35 डिग्री के पार पहुंच गया है।
मानसून की विदाई हो चुकी है, लेकिन सोलापुर के किसानों की बारिश की उम्मीद अभी भी बनी हुई है। लौटते मानसून से भी पानी बरसने की आस लगाए किसानों को निराशा हाथ लगी है। जून में बारिश नहीं हुई। जुलाई में कुछ फुहारें पड़ीं तो किसानों ने उम्मीद के साथ बुआई कर दी, लेकिन इसके बाद मानसून ने साथ नहीं दिया।
बारिश के अभाव और तेज गर्मी के कारण खेतों की मिट्टी में मौजूद नमी भी खत्म हो गई है। इसका असर खरीफ की फसलों पर पड़ा और अब रबी की फसल पर भी संकट मंडराने लगा है। बारिश नहीं होने के कारण सोलापुर में इस मौसम में भी तापमान 35 डिग्री के पार पहुंच गया है। अक्टूबर की तेज गर्मी में खेतों में बची फसलें भी मुरझाने लगी हैं।
खेतों में फसल खड़ी, लेकिन पैदावार की उम्मीद टूटी
करमाला तहसील के किसान भारत पवार के मुताबिक, इस बार हालात काफी मुश्किल हैं। बुआई के बाद उम्मीद थी कि आगे बारिश होगी और फसल को संभलने का मौका मिलेगा। लेकिन अब खेतों में खड़ी फसल से भी उत्पादन की उम्मीद खत्म हो चुकी है।
मंगलवेढ़ा रोड पर भोसे गांव के किसान प्रतीक कोपे ने खेत में खाद और कीटनाशक दवाओं पर 70 हजार रुपये खर्च किए थे। पौधों में फूल आने के बाद उन्हें अच्छी पैदावार की उम्मीद थी, लेकिन अब उनकी उम्मीदें टूट गई हैं। गांव के दूसरे किसानों के सामने भी अगली फसल की बुआई के लिए बीज का संकट खड़ा हो गया है।
सामान्य से 50 फीसदी कम बारिश
सोलापुर जिले में महाराष्ट्र के दूसरे जिलों की तुलना में औसतन सबसे कम 525 मिलीमीटर बारिश होती है। इस बार यहां सामान्य से भी 50 फीसदी कम वर्षा हुई है।
सबसे ज्यादा संकट: जिले की 11 तहसीलें—सोलापुर उत्तर, सोलापुर दक्षिण, बार्शी, अक्कलकोट, मोहोल, माढा, करमाला, पंढरपुर, मालशिरस, सांगोला और मंगलवेढ़ा—सूखे की मार झेल रही हैं। राज्य सरकार ने सभी तालुकों को सूखाग्रस्त घोषित किया है।
प्रमुख फसलें: जिले में मुख्य रूप से ज्वार, अरहर, सोयाबीन, सूरजमुखी, गन्ना, उड़द, मक्का और प्याज की खेती होती है। सूखे की वजह से कहीं पौधे सूख चुके हैं, तो कहीं फसल खड़ी होने के बावजूद उसमें दाना नहीं आया है।
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