जम्मू-कश्मीर ने पहली बार रणजी ट्रॉफी जीतकर भारतीय क्रिकेट में इतिहास रच दिया। टीम ने फाइनल में कर्नाटक के खिलाफ मैच अपनी पहली पारी की बढ़त के आधार पर जीता। पहले पारी में जम्मू-कश्मीर ने 291 रनों की बढ़त हासिल की थी। पांचवें दिन टीम ने दूसरी पारी में चार विकेट पर 342 रन बनाकर कुल बढ़त 633 रनों तक पहुंचा दी। कप्तान पारस डोगरा ने अपनी टीम की दूसरी पारी घोषित की, और दोनों टीमों के कप्तानों ने दिन का खेल समाप्त करने पर सहमति जताई।

इकबाल-साहिल ने दिखाई बल्लेबाजी की ताकत
इस मैच में आकिब नबी डार ने पहली पारी में कर्नाटक के बल्लेबाजों को आउट कर टीम को मजबूती दी। दूसरी पारी में सलामी बल्लेबाज कामरान इकबाल और साहिल लोटरा ने पांचवें विकेट के लिए 197 रनों की शानदार नाबाद साझेदारी निभाई। इकबाल ने 311 गेंदों पर 16 चौकों और 3 छक्कों के साथ 160 रन बनाए, जबकि साहिल ने 226 गेंदों पर 8 चौकों और 3 छक्कों की मदद से 101 रन की पारी खेली।

कर्नाटक के गेंदबाज रहे बेजुबान
पांचवें दिन दोनों बल्लेबाजों ने कर्नाटक के गेंदबाजों को किसी भी सफलता का मौका नहीं दिया। लंच तक दोनों बल्लेबाजों ने कड़ी पारी खेली और दिन के खेल के अंत तक कोई विकेट नहीं गिरा। इस तरह मैच ड्रॉ रहा, लेकिन जम्मू-कश्मीर ने पहली पारी की बढ़त के आधार पर जीत दर्ज कर ली।

पहली पारी में बढ़त के बावजूद फॉलोऑन नहीं
जम्मू-कश्मीर ने कर्नाटक को अपनी पहली पारी में 293 रन पर रोक दिया था। 291 रनों की बढ़त के बावजूद टीम ने फॉलोऑन नहीं दिया, और अंततः अपने इतिहास में पहली बार रणजी ट्रॉफी पर कब्जा किया।

मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने दी खुशी
फाइनल मैच को देखने के लिए जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला स्टेडियम पहुंचे। उन्होंने सोशल मीडिया पर मैच की तस्वीरें साझा कर इस ऐतिहासिक जीत का जश्न मनाया।

लंबा संघर्ष, बड़ी उपलब्धि
जम्मू-कश्मीर ने पहली बार 1959-60 में रणजी ट्रॉफी में भाग लिया था, लेकिन इसे कभी मजबूत दावेदार नहीं माना गया। अब तक 334 मैचों में केवल 45 जीतें ही मिली थीं। टीम को पहली सफलता 1982-83 में मिली, लेकिन खिताब जीतना हमेशा चुनौतीपूर्ण रहा। इस बार कोच अजय शर्मा और कप्तान पारस डोगरा के नेतृत्व में टीम ने अपने विश्वास को जीत में बदला और इतिहास रच दिया।