उत्तर प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों में प्रतिनियुक्ति पर कार्यरत कर्मचारियों को लेकर सरकार ने नया निर्देश जारी किया है। अब किसी भी कर्मचारी को हटाने का फैसला कॉलेज के प्रधानाचार्य अपने स्तर पर नहीं ले सकेंगे। इसके लिए पहले शासन से अनुमति लेना अनिवार्य होगा। इस संबंध में अपर मुख्य सचिव अमित कुमार घोष ने सभी मेडिकल कॉलेजों के प्रधानाचार्यों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं।
प्रदेश में इस समय 28 स्वशासी राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय संचालित हो रहे हैं, जिनमें से अधिकांश जिला अस्पतालों को अपग्रेड कर स्थापित किए गए हैं। इन अस्पतालों में पहले से कार्यरत चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों को जरूरत के अनुसार प्रतिनियुक्ति पर मेडिकल कॉलेजों में तैनात किया गया है।
हाल के दिनों में कुछ कॉलेजों से ऐसे मामले सामने आए थे, जहां प्रधानाचार्यों ने प्रतिनियुक्ति पर कार्यरत कर्मचारियों को हटाना शुरू कर दिया था। इस पर संज्ञान लेते हुए शासन ने हस्तक्षेप किया और स्पष्ट कर दिया कि बिना अनुमति किसी भी कर्मचारी को नहीं हटाया जाएगा।
निर्देशों के अनुसार, इन कर्मचारियों की प्रतिनियुक्ति प्रारंभिक रूप से तीन वर्ष के लिए की गई है, जिसे आवश्यकता पड़ने पर पांच वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है। जिन कर्मचारियों की तीन साल की अवधि पूरी हो चुकी है, उनके संबंध में चिकित्सा शिक्षा एवं प्रशिक्षण महानिदेशालय को कम से कम तीन महीने पहले जानकारी देना जरूरी होगा।
सरकार ने यह भी साफ किया है कि किसी भी कार्मिक को हटाने से पहले महानिदेशालय की स्वीकृति अनिवार्य होगी, ताकि कर्मचारियों के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।