पटना के चांदनी चौक इलाके के इलेक्ट्रॉनिक्स व्यापारी बिंदा सिंह की वियतनाम में इलाज के दौरान मौत हो गई है। पिछले तीन दिनों से उनका परिवार उनके पार्थिव शरीर को भारत लाने के लिए इंतजार कर रहा है, लेकिन वीज़ा और तकनीकी कारणों के चलते स्थानीय प्रशासन ने अनुमति नहीं दी है। अब परिवार ने केंद्र सरकार से हस्तक्षेप की मांग की है।
मामला क्या है?
बिंदा सिंह, जो विग्रहपुर के निवासी थे, एक महीने पहले 90 सदस्यीय भारतीय व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल के साथ वियतनाम गए थे। इस यात्रा का आयोजन एक निजी टूर ऑपरेटर ने किया था, जिसमें पटना से करीब 25 लोग शामिल थे।
परिवार के अनुसार, वापसी की तैयारी के दौरान वियतनाम के एक एयरपोर्ट पर उन्हें दिल का दौरा पड़ा। तुरंत उन्हें फु क्वोक द्वीप के अस्पताल में भर्ती कराया गया और बाद में बेहतर इलाज के लिए हो ची मिन्ह सिटी भेजा गया।
वीज़ा समस्या बनी बाधा
परिवार का कहना है कि इस स्थानांतरण के लिए अलग वीज़ा की जरूरत थी, जो पहले से नहीं लिया गया था। शुरुआत में बिंदा सिंह की स्थिति सुधरी और उन्हें वेंटिलेटर से हटाकर सामान्य वार्ड में शिफ्ट किया गया, लेकिन बाद में हालत बिगड़ गई और उनकी मृत्यु हो गई।
मौत के बाद भी वीज़ा संबंधी समस्याओं के कारण उनका पार्थिव शरीर भारत नहीं लाया जा सका। साथ ही, उनके पोते और एक अन्य रिश्तेदार भी इलाज के दौरान वहीं फंसे हुए हैं।
परिवार की आपील
बिंदा सिंह के बेटे राजेश कुमार ने कहा कि भारत सरकार से संपर्क किया गया, लेकिन कोई समाधान नहीं निकला। टूर ऑपरेटर ने भी दूरी बना ली। उन्होंने कहा, “मेरे पिता 75 वर्ष से अधिक उम्र के थे और उनके पास ट्रैवल इंश्योरेंस नहीं था।”
बिंदा सिंह की पत्नी मालती देवी ने भावुक अपील की: “मेरे पति अब नहीं रहे, कम से कम उनका शव तो वापस लाया जाए। हमारे बच्चे भी वहीं फंसे हैं। सरकार से मदद चाहिए।”
पोती अमीषा ने बताया कि परिवार विदेश मंत्रालय और वियतनामी अधिकारियों से लगातार संपर्क में है, लेकिन तीन दिन बीत जाने के बाद भी वीज़ा प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पाई।
उठ रहे सवाल
इस घटना ने विदेश में भारतीय नागरिकों के मेडिकल इमरजेंसी और शव वापसी (repatriation) मामलों में समन्वय की कमी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।