पटना। बिहार सरकार ने राज्य से बाहर काम कर रहे प्रवासी श्रमिकों के हित में बड़ा निर्णय लिया है। अब किसी प्रवासी श्रमिक की मृत्यु होने पर उसके परिजनों को दो लाख रुपये के बजाय चार लाख रुपये की सहायता राशि प्रदान की जाएगी। यह फैसला शुक्रवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में हुई राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में लिया गया।
मंत्रिमंडल की बैठक में कुल 17 प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। सूत्रों के अनुसार, श्रमिकों की मृत्यु की स्थिति में मुआवजा बढ़ाने के साथ-साथ शव को उनके गृह जिले तक पहुंचाने का पूरा खर्च भी अब राज्य सरकार उठाएगी। इसके लिए मृतक के स्वजनों को कोई राशि खर्च नहीं करनी होगी। वहीं, घायल प्रवासी श्रमिकों को पहले की तरह मुफ्त चिकित्सा सुविधा मिलती रहेगी।
पॉक्सो मामलों की सुनवाई में तेजी के लिए नए पद
बैठक में पॉक्सो अधिनियम से जुड़े मामलों के शीघ्र निपटारे को लेकर भी अहम निर्णय लिया गया। लंबित मामलों की संख्या को देखते हुए अदालतों में सुनवाई तेज करने के लिए नए पदों के सृजन को मंजूरी दी गई है। फिलहाल राज्य में पॉक्सो से जुड़े करीब छह हजार मामले लंबित बताए जा रहे हैं। इसके अलावा भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 218(3) में संशोधन के प्रस्ताव को भी स्वीकृति दी गई है, जिसमें ‘भारतीय’ के स्थान पर ‘राज्य नागरिक सुरक्षा संहिता’ शब्द प्रयोग करने का निर्णय लिया गया है।
मंत्रिमंडल के अन्य अहम फैसले
मंत्रिमंडल ने प्रदेश में 125 यूनिट मुफ्त बिजली योजना के लिए 349 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की है। इसके साथ ही 15 साल पुराने वाहनों के पंजीकरण नियमों में बदलाव को भी मंजूरी दी गई है, जो सरकारी और निजी दोनों प्रकार के वाहनों पर लागू होंगे।
इसके अलावा विधानसभा के आगामी बजट सत्र में पेश किए जाने वाले तृतीय अनुपूरक बजट के प्रारूप को भी कैबिनेट की हरी झंडी मिली है।
वीरपुर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस अब राज्य संसाधनों से बनेगा
सुपौल जिले के वीरपुर में प्रस्तावित सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के निर्माण को लेकर भी बड़ा फैसला लिया गया। अब यह परियोजना राज्य सरकार अपने संसाधनों से पूरी करेगी। पहले यह विश्व बैंक की सहायता से बनाई जा रही थी, लेकिन योजना अवधि समाप्त होने के कारण निर्माण अधूरा रह गया था।
सरकार ने फिलहाल इसके लिए 32 करोड़ रुपये स्वीकृत किए हैं। वीरपुर में स्थित यह फिजिकल मॉडलिंग सेंटर देश का दूसरा ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस इन हाइड्रोलॉजी’ होगा, जहां कोसी समेत अन्य प्रमुख नदियों के बहाव, गाद और जल गुणवत्ता का वैज्ञानिक अध्ययन किया जाएगा।
यह केंद्र जल संसाधन विभाग के अंतर्गत तटबंधों और बांधों की संरचनात्मक रूपरेखा तैयार करने में अहम भूमिका निभाएगा, जिससे समय और लागत दोनों की बचत होगी। अभी कोसी नदी से जुड़े अध्ययन के लिए बिहार को पुणे स्थित संस्थान पर निर्भर रहना पड़ता है। वीरपुर केंद्र के शुरू होने से बाढ़ प्रबंधन और नदी नियंत्रण की योजनाएं अधिक सुरक्षित और प्रभावी बन सकेंगी।