पटना। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सोमवार को विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। उनका त्यागपत्र मंत्री विजय चौधरी और एमएलसी संजय गांधी के माध्यम से परिषद में सौंपा गया। सभापति अवधेश नारायण सिंह ने इस्तीफा स्वीकार किए जाने की पुष्टि की।

बताया गया है कि मुख्यमंत्री का इस्तीफा बेहद संक्षिप्त था और इसमें महज 29 शब्द शामिल थे। उनके साथ जदयू के कई वरिष्ठ नेता भी इस दौरान मौजूद रहे।

दरअसल, संविधान के प्रावधानों के अनुसार कोई भी व्यक्ति एक समय में दो सदनों का सदस्य अधिकतम 14 दिनों तक ही रह सकता है। नीतीश कुमार 16 मार्च को राज्यसभा के लिए निर्वाचित हुए थे, जिसके चलते उन्हें तय समय सीमा के भीतर एक पद छोड़ना आवश्यक था। इसी नियम के तहत उन्होंने विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा दिया। हालांकि, वे फिलहाल बिहार के मुख्यमंत्री पद पर बने हुए हैं और इस पद को लेकर आगे की स्थिति स्पष्ट नहीं की गई है।

नितिन नवीन का इस्तीफा

इधर, भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र से विधायक नितिन नवीन ने भी अपने पद से इस्तीफा देने की घोषणा की है। उन्होंने रविवार को ही प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी को अपना इस्तीफा सौंप दिया था, जिसे सोमवार को औपचारिक रूप से विधानसभा में प्रस्तुत किया जाएगा।

सूत्रों के मुताबिक, नितिन नवीन रविवार को ही इस्तीफा देने वाले थे और विधानसभा अध्यक्ष कार्यालय में इसकी तैयारी भी कर ली गई थी, लेकिन अचानक उन्हें असम जाना पड़ा, जिसके चलते प्रक्रिया टल गई।

सोशल मीडिया पर दी जानकारी

नितिन नवीन ने सोशल मीडिया के माध्यम से अपने इस्तीफे की जानकारी साझा की। उन्होंने कहा कि पार्टी द्वारा सौंपी गई नई जिम्मेदारी के तहत वह बिहार और अपने क्षेत्र के विकास के लिए निरंतर काम करते रहेंगे। साथ ही उन्होंने कार्यकर्ताओं और जनता से अपने संबंधों को अटूट बताते हुए भविष्य में भी सहयोग बनाए रखने की बात कही।

उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में विकसित भारत और विकसित बिहार के लक्ष्य को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध रहने का भी भरोसा जताया।