पटना। बिहार की सियासत में नई सरकार के गठन के बाद अब मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर हलचल तेज हो गई है। सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी विधानसभा में बहुमत साबित करने के बाद कैबिनेट विस्तार कर सकते हैं। माना जा रहा है कि इस विस्तार में एनडीए के प्रमुख सहयोगी दलों—भाजपा, जदयू, लोजपा (रामविलास), हम और रालोमो—के कई पुराने चेहरों को दोबारा मौका मिल सकता है।

जानकारी के मुताबिक, भाजपा नेतृत्व 4 मई को पश्चिम बंगाल, असम सहित अन्य राज्यों के विधानसभा चुनाव परिणाम आने के बाद कैबिनेट विस्तार की प्रक्रिया आगे बढ़ा सकता है। इससे पहले सम्राट चौधरी विधानसभा का सत्र बुलाकर बहुमत साबित करेंगे।

हालांकि, शुरुआती चरण में मंत्रिमंडल काफी सीमित रखा गया है। पहली सूची में केवल कुछ ही नेताओं को शपथ दिलाई गई, जिससे साफ संकेत मिला कि सहयोगी दलों के बीच अभी मंत्री पदों और विभागों के बंटवारे को लेकर अंतिम सहमति नहीं बन पाई है।

जदयू नेता विजय कुमार चौधरी के हालिया बयान से भी यही संकेत मिला था कि मंत्रिमंडल को लेकर अभी विस्तृत चर्चा नहीं हुई है। ऐसे में माना जा रहा है कि भाजपा और जदयू के बीच पहले आपसी सहमति बनेगी, जिसके बाद अन्य सहयोगी दलों से बातचीत की जाएगी।

सूत्र यह भी बताते हैं कि विधानसभा अध्यक्ष का पद भी दोनों प्रमुख दलों के बीच बातचीत का हिस्सा बन सकता है। फिलहाल इस पद पर भाजपा के प्रेम कुमार आसीन हैं।

कुल मिलाकर, बिहार में नई सरकार के गठन के बाद अब सबकी नजरें आगामी कैबिनेट विस्तार और उसमें होने वाले राजनीतिक संतुलन पर टिकी हुई हैं।