नई दिल्ली में सुप्रीम कोर्ट की एक सुनवाई के दौरान शुक्रवार को एक अनोखा मामला सामने आया, जिसने अदालत को भी हैरान कर दिया। बिहार की एक महिला अधिकारी के खिलाफ रिश्वत मामले में यह दलील दी गई कि जब्त की गई नकदी को चूहों ने नुकसान पहुंचा दिया। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने हैरानी जताते हुए टिप्पणी की और फिलहाल सजा पर रोक लगाकर आरोपी को जमानत दे दी।
यह मामला बिहार की अरुणा कुमारी से जुड़ा है, जो चाइल्ड डेवलपमेंट प्रोग्राम ऑफिसर (CDPO) के पद पर कार्यरत थीं। उन पर ₹10,000 की रिश्वत मांगने का आरोप लगा था, जिसके बाद उनके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धाराओं 7 और 13(2) के तहत केस दर्ज किया गया।
ट्रायल कोर्ट से राहत, हाई कोर्ट ने सुनाया दोषी करार
शुरुआत में ट्रायल कोर्ट ने अरुणा कुमारी को बरी कर दिया था, लेकिन बाद में पटना हाई कोर्ट ने इस फैसले को पलटते हुए उन्हें दोषी ठहराया। हाई कोर्ट ने अलग-अलग धाराओं में उन्हें क्रमशः चार साल और तीन साल की सजा सुनाई थी।
हाई कोर्ट के आदेश में यह भी कहा गया कि बरामद रिश्वत की रकम अदालत में पेश नहीं की जा सकी, क्योंकि दावा किया गया कि उसे मालखाने में रखे-रखे चूहों ने नुकसान पहुंचा दिया। हालांकि, मालखाना रजिस्टर में रकम जमा होने का रिकॉर्ड मौजूद था।
सुप्रीम कोर्ट ने जताई हैरानी
जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस के.वी. विश्वनाथन की पीठ ने मामले की सुनवाई की। सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि बरामद नकदी के चूहों द्वारा नष्ट होने का दावा चौंकाने वाला है और इस पर गंभीर सवाल उठते हैं। अदालत ने यह भी कहा कि ऐसे स्पष्टीकरण पर भरोसा करना कठिन है।
फिलहाल सजा पर रोक, जमानत मंजूर
सुप्रीम कोर्ट ने मामले की परिस्थितियों को देखते हुए आरोपी की सजा पर अंतरिम रोक लगाते हुए उन्हें जमानत दे दी है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मामले की विस्तृत सुनवाई आगे की तारीख पर की जाएगी।
यह मामला अब न सिर्फ भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर चर्चा में है, बल्कि सबूतों के रखरखाव और जांच व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर रहा है।