दिल्ली विधानसभा के विवादित वीडियो को लेकर विधानसभा स्पीकर विजेंद्र गुप्ता ने शनिवार को अहम बयान दिया। उन्होंने कहा कि वीडियो की फॉरेंसिक जांच फॉरेंसिक साइंस लैबोरेटरी (एफएलएल) में कराई गई, जिसमें यह स्पष्ट हुआ कि वीडियो और ऑडियो में कोई छेड़छाड़ नहीं की गई है और यह असली है।

स्पीकर गुप्ता ने कहा, "जिस सदन की रिकॉर्डिंग पर सवाल उठाए गए, उसे विपक्ष की मांग पर एफएलएल को भेजा गया था। रिपोर्ट में साफ लिखा है कि वीडियो का कोई भी भाग बदला या 'डॉक्टरिंग' नहीं किया गया है। उस दिन मैंने दोनों पक्षों को अपने कमरे में बुलाया था, और सत्ता पक्ष ने भी इस जांच पर सहमति दी थी।"

उन्होंने आगे कहा कि 9 जनवरी को अचानक यह खबर आई कि पंजाब सरकार ने पहले ही वीडियो की जांच कर ली, रिपोर्ट तैयार हो चुकी है और एफआईआर भी दर्ज कर ली गई। "यह जो नाटकीय घटनाक्रम हुआ, आज उसका सच सामने आ गया है," उन्होंने कहा।

विजेंद्र गुप्ता ने यह भी कहा कि पंजाब सरकार की फॉरेंसिक साइंस लैबोरेटरी की जांच की CBI जांच करवाई जाएगी। उन्होंने बताया कि वीडियो में 'गुरु' शब्द का इस्तेमाल मिला है और पंजाब में हुई घटनाओं की पूरी तहकीकात के लिए CBI जांच आवश्यक है।

इससे पहले पंजाब में आम आदमी पार्टी के पुलिस अधिकारियों ने दावा किया था कि उनकी फॉरेंसिक जांच में वीडियो में छेड़छाड़ हुई है। इस पर दिल्ली विधानसभा में आम आदमी पार्टी के चीफ व्हिप संजीव झा ने स्पीकर से आग्रह किया कि मंत्री कपिल मिश्रा के खिलाफ सोशल मीडिया पर क्लिप शेयर करने पर विशेषाधिकार हनन का मामला चलाया जाए।

विधानसभा में क्या हुआ था
गुरु तेग बहादुर की शहादत के 350 वर्ष पूरे होने पर विधानसभा में विशेष चर्चा आयोजित की गई थी। इस दौरान आम आदमी पार्टी की नेता और पूर्व मुख्यमंत्री आतिशी ने कथित रूप से कुछ ऐसे शब्द बोले, जिन्हें भाजपा नेताओं ने सिख धर्म गुरु के अपमान के रूप में प्रस्तुत किया। भाजपा विधायकों ने यह वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किया और आतिशी पर कड़ी कार्रवाई की मांग की।