देश के सबसे व्यस्त रेलवे स्टेशनों में शामिल नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर यात्रियों की सुरक्षा व्यवस्था को आधुनिक तकनीक से सुसज्जित किया जा रहा है। स्टेशन परिसर में जल्द ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित निगरानी प्रणाली लागू की जाएगी, जिसमें अत्याधुनिक कैमरे और फेस रिकग्निशन तकनीक का उपयोग किया जाएगा। इस व्यवस्था का उद्देश्य अपराधों पर अंकुश लगाना और नियमों का उल्लंघन करने वालों पर तुरंत कार्रवाई सुनिश्चित करना है।
मार्च तक पूरा करने का लक्ष्य
उत्तर रेलवे के अधिकारियों के अनुसार इस परियोजना को मार्च तक पूरा करने की योजना है। फिलहाल इसे पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर लागू किया जाएगा। यदि यह प्रणाली सफल रहती है, तो बाद के चरणों में दिल्ली के अन्य प्रमुख रेलवे स्टेशनों पर भी इसे लागू किया जाएगा। यह पहल रोजाना स्टेशन से गुजरने वाले लाखों यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए की जा रही है।
संवेदनशील क्षेत्रों पर एआई कैमरों की पैनी नजर
एआई आधारित कैमरे स्टेशन के प्लेटफॉर्म, ट्रैक के आसपास, फुटओवर ब्रिज, प्रवेश और निकास द्वारों के साथ-साथ अन्य संवेदनशील स्थानों पर लगाए जाएंगे। ये कैमरे संदिग्ध गतिविधियों को पहचानने, भीड़ के व्यवहार का विश्लेषण करने और नियमों के उल्लंघन की स्थिति में तुरंत अलर्ट जारी करने में सक्षम होंगे। यदि कोई यात्री अवैध रूप से पटरियां पार करता है या रेलिंग फांदने की कोशिश करता है, तो सिस्टम तत्काल सुरक्षा एजेंसियों को सूचना देगा। इसके बाद आरपीएफ और जीआरपी की टीमें मौके पर पहुंचकर आवश्यक कार्रवाई करेंगी।
फेस रिकग्निशन से अपराधियों पर शिकंजा
इस नई सुरक्षा व्यवस्था की अहम कड़ी फेस रिकग्निशन तकनीक होगी। इसके माध्यम से पहले से चिन्हित अपराधियों, जेबकतरों और संदिग्ध व्यक्तियों की पहचान आसान हो जाएगी। स्टेशन में प्रवेश करते ही यदि कोई संदिग्ध व्यक्ति कैमरों की पकड़ में आता है, तो सिस्टम अलर्ट जारी कर उसकी गतिविधियों पर नजर रखेगा। इससे चोरी और अन्य आपराधिक घटनाओं में कमी आने की उम्मीद है। रेलवे अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि यह तकनीक सभी कानूनी प्रावधानों और गोपनीयता मानकों का पालन करते हुए लागू की जाएगी।
रेलवे में बढ़ता एआई का दखल
भारतीय रेलवे पिछले कुछ वर्षों से सुरक्षा और संचालन में एआई व डिजिटल तकनीक के इस्तेमाल को लगातार बढ़ा रहा है। सुरक्षा के साथ-साथ एआई का उपयोग ट्रैक और कोच की निगरानी, प्रिडिक्टिव मेंटेनेंस, सिग्नलिंग सिस्टम और भीड़ प्रबंधन में भी किया जा रहा है। कई मार्गों पर एआई आधारित सिस्टम पटरियों और ट्रेन के पहियों में आने वाली तकनीकी खामियों का पहले ही पता लगाने में मदद कर रहे हैं। बड़े स्टेशनों पर भीड़ के दबाव का आकलन कर अतिरिक्त ट्रेनों के संचालन और प्लेटफॉर्म प्रबंधन में भी एआई की सहायता ली जा रही है।
ट्रैक पार करने की लापरवाही बन रही जानलेवा
उत्तर रेलवे के मुताबिक एआई आधारित सुरक्षा व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य रेलवे पटरियों पर होने वाले हादसों को कम करना है। हर साल अवैध रूप से ट्रैक पार करने के कारण बड़ी संख्या में लोग दुर्घटनाओं का शिकार होते हैं। आंकड़ों के अनुसार पिछले वर्ष जनवरी से अगस्त के बीच रेलवे पटरियों पर 947 लोगों की जान गई थी, जबकि साल के अंत तक यह संख्या लगभग एक हजार तक पहुंच गई। वहीं, 2020 से 2024 के बीच कुल 6570 लोगों की मौत रेलवे ट्रैक से जुड़े हादसों में हुई।
पिछले वर्षों के आंकड़े
2020 से 2025 तक रेलवे ट्रैक से जुड़ी दुर्घटनाओं, घायलों और मृतकों के आंकड़े यह साफ दिखाते हैं कि सुरक्षा को लेकर सख्त कदम उठाना बेहद जरूरी हो गया है। रेलवे का मानना है कि एआई तकनीक के व्यापक इस्तेमाल से इन हादसों में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकेगी।