नई दिल्ली। दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर योगेश सिंह को एक बार फिर इस महत्वपूर्ण पद की जिम्मेदारी सौंपी गई है। उन्हें लगातार दूसरे कार्यकाल के लिए नियुक्त किया गया है, जो अगले पांच वर्षों तक प्रभावी रहेगा। इस निर्णय को उनके पहले कार्यकाल में किए गए शैक्षणिक और प्रशासनिक सुधारों की निरंतरता के रूप में देखा जा रहा है।
प्रो. योगेश सिंह ने वर्ष 2021 में दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलपति के रूप में कार्यभार संभाला था। पहले कार्यकाल के दौरान उन्होंने विश्वविद्यालय की व्यवस्था और अकादमिक ढांचे में कई अहम बदलाव लागू किए, जिनका सीधा असर संस्थान की कार्यप्रणाली पर देखने को मिला।
एनईपी-2020 और प्रवेश प्रक्रिया में बड़े बदलाव
उनके कार्यकाल की प्रमुख उपलब्धियों में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP-2020) का प्रभावी क्रियान्वयन शामिल रहा। इसके साथ ही स्नातक पाठ्यक्रमों में व्यापक सुधार किए गए, जिससे शिक्षा प्रणाली अधिक लचीली और बहु-विषयक बनी।
विश्वविद्यालय में प्रवेश प्रक्रिया को पारदर्शी और केंद्रीकृत बनाने के लिए कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट (CUET) को लागू किया गया। इस व्यवस्था ने एडमिशन प्रक्रिया को अधिक निष्पक्ष और एक समान बनाया।
इसके अलावा चार वर्षीय स्नातक कार्यक्रम को भी सफलतापूर्वक लागू किया गया, जिससे छात्रों को विषय चयन और अध्ययन में अधिक विकल्प मिले।
डिजिटल गवर्नेंस को मिला बढ़ावा
प्रो. सिंह के नेतृत्व में विश्वविद्यालय में डिजिटल गवर्नेंस पर विशेष जोर दिया गया। प्रशासनिक प्रक्रियाओं को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाकर कागजी कार्रवाई में कमी की गई और कार्यप्रणाली को अधिक तेज और पारदर्शी बनाया गया।
छात्रों और शिक्षकों के लिए ऑनलाइन सेवाओं का विस्तार किया गया, जिससे शैक्षणिक और प्रशासनिक कार्यों में सुविधा बढ़ी।
आगे की दिशा
दूसरे कार्यकाल में भी इन सुधारों को आगे बढ़ाने की उम्मीद जताई जा रही है। विश्वविद्यालय प्रशासन का मानना है कि इन पहलों से दिल्ली विश्वविद्यालय शिक्षा के क्षेत्र में और अधिक मजबूती के साथ आगे बढ़ेगा।