नई दिल्ली। राजधानी में सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जों और बिना अनुमति हो रहे निर्माण पर अब कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उपराज्यपाल ने दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि पूरे शहर में अतिक्रमण के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति अपनाई जाए।

इसके लिए ड्रोन सर्वे, जियो-टैगिंग और रियल-टाइम डिजिटल मॉनिटरिंग जैसी आधुनिक तकनीकों का व्यापक उपयोग किया जाएगा, ताकि किसी भी अवैध गतिविधि की तुरंत पहचान कर मौके पर कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।

संवेदनशील इलाकों पर विशेष निगरानी

यमुना के बाढ़ क्षेत्र (O-Zone) सहित राजधानी के संवेदनशील इलाकों पर विशेष निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं। उपराज्यपाल ने कहा कि सरकारी जमीनों की सुरक्षा के लिए पारंपरिक व्यवस्था के बजाय तकनीक आधारित निगरानी प्रणाली को मजबूत करना जरूरी है।

DDA की सलाहकार परिषद की बैठक में यह भी तय किया गया कि एक रियल-टाइम मॉनिटरिंग सिस्टम विकसित किया जाएगा, जिससे किसी भी नए अतिक्रमण या निर्माण की तत्काल जानकारी मिल सके।

3700 से अधिक भूखंडों की निगरानी

DDA ने बताया कि दिल्ली में खाली सरकारी जमीनों के 3,700 से अधिक भूखंडों की जियो-टैगिंग की जा चुकी है, जिनका कुल क्षेत्रफल करीब 21,773 एकड़ है। इन सभी क्षेत्रों पर लगातार डिजिटल निगरानी की जा रही है।

ड्रोन सर्वे से पूरे शहर की मैपिंग

DDA, MCD और सर्वे ऑफ इंडिया के संयुक्त अभियान के तहत दिल्ली का व्यापक ड्रोन सर्वे जारी है। कुल 1,370 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में से अब तक 1,122 वर्ग किलोमीटर का सर्वे पूरा हो चुका है। यमुना के बाढ़ क्षेत्र का ड्रोन सर्वे भी पूरा कर लिया गया है, जिससे अतिक्रमण और अवैध निर्माण की पहचान और तेजी से की जा सकेगी।

241 एकड़ जमीन मुक्त कराई गई

DDA ने जानकारी दी कि अप्रैल 2025 से अब तक 241.51 एकड़ सरकारी जमीन को अतिक्रमण से मुक्त कराया गया है। वहीं विकास क्षेत्रों में 235.96 एकड़ जमीन से अवैध निर्माण हटाए गए हैं।

आर्किटेक्ट्स पर भी होगी कार्रवाई

उपराज्यपाल ने स्पष्ट किया कि अवैध निर्माण मामलों में केवल मकान मालिक ही नहीं, बल्कि जिम्मेदार आर्किटेक्ट्स पर भी कार्रवाई की जाएगी। ऐसे आर्किटेक्ट्स को डि-एम्पैनल और ब्लैकलिस्ट करने के निर्देश दिए गए हैं।

साथ ही असुरक्षित और जर्जर भवनों की जानकारी तत्काल MCD को भेजने को कहा गया है। लैंड पूलिंग क्षेत्रों में अवैध निर्माण रोकने के लिए फ्लाइंग स्क्वॉड और क्विक रिस्पॉन्स टीमों को और सक्रिय करने के निर्देश भी दिए गए हैं।

नियोजित विकास पर जोर

बैठक में दिल्ली के सुनियोजित और सतत विकास पर भी चर्चा हुई। उपराज्यपाल ने कहा कि राजधानी के विकास के लिए पारदर्शिता, तकनीक और विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय बेहद जरूरी है।

उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक के उपयोग से न केवल अतिक्रमण पर नियंत्रण होगा, बल्कि दिल्ली को अधिक सुरक्षित और व्यवस्थित शहर बनाने में भी मदद मिलेगी।