नई दिल्ली: देश में बढ़ती महंगाई के बीच केंद्र सरकार ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बड़ी कटौती की है। मोदी सरकार ने एक्साइज ड्यूटी में 10 रुपये प्रति लीटर की कमी की है। सरकार का यह कदम आम जनता के लिए राहत के तौर पर पेश किया जा रहा है, लेकिन विपक्ष ने इसे चुनावी स्टंट बताते हुए तीखा विरोध किया है।
कांग्रेस का आरोप: चुनाव के लिए जनता को गुमराह किया जा रहा
कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने कहा कि यह निर्णय केवल राज्य विधानसभा चुनावों को देखते हुए लिया गया है। उन्होंने कहा कि पिछले 12 वर्षों में जब वैश्विक कच्चे तेल की कीमतें सात बार गिर गईं, तब सरकार ने जनता को इसका लाभ नहीं दिया, बल्कि लगातार टैक्स में बदलाव कर अपनी तिजोरी भरी। पवन खेड़ा का कहना है कि दिल्ली में पेट्रोल-डीजल की कीमतें अभी भी उच्च स्तर पर हैं, और यह कटौती केवल तेल कंपनियों के घाटे को कम करने के लिए है, न कि आम आदमी की जेब के लिए।
कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने कहा कि सरकार द्वारा की गई यह छूट असल में जनता के अपने पैसे का हिस्सा है। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर यह पैसा जनता का ही वापस किया जा रहा है, तो इसका प्रचार-प्रसार करने की आवश्यकता क्यों है।
विपक्ष ने करारा हमला किया
आरजेडी सांसद मीसा भारती ने कटौती को “ऊंट के मुंह में जीरा” करार दिया। उन्होंने कहा कि पेट्रोल पंपों पर ईंधन की किल्लत है, लंबी कतारें लगी हैं, और इससे आम जनता की रोजमर्रा की जिंदगी बुरी तरह प्रभावित हो रही है।
तृणमूल कांग्रेस सांसद सागरिका घोष ने सरकार की नीयत पर सवाल उठाते हुए कहा कि पिछले तीन हफ्तों से देश को गुमराह किया जा रहा था कि ईंधन पर्याप्त है। उन्होंने कहा कि अब स्थिति बेकाबू हो गई है और छोटे व्यवसाय, छात्र और बुजुर्ग इस कमी से प्रभावित हैं।
कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने भी केंद्र सरकार के फैसले को पूरी तरह चुनावी चाल बताया और कहा कि यह कदम केवल आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए उठाया गया है।