नई दिल्ली: भारतीय शेयर बाजार शुक्रवार को बड़ी गिरावट के साथ बंद हुए। बीएसई का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 1,690.23 अंक यानी 2.25 प्रतिशत टूटकर 73,583.22 पर बंद हुआ। वहीं, एनएसई का 50 शेयरों वाला निफ्टी 486.85 अंक या 2.09 प्रतिशत गिरकर 22,819.60 पर बंद हुआ।

विशेषज्ञों की राय:
लिवेलॉन्ग वेल्थ के संस्थापक हरिप्रसाद के अनुसार, वैश्विक बाजार में जोखिमों से बचने की प्रवृत्ति साफ नजर आ रही है। अमेरिकी बाजारों में बिकवाली का दबाव बढ़ा है। नैस्डैक कंपोजिट 2.4 प्रतिशत गिरकर करेक्शन ज़ोन में पहुंच गया और अपने हालिया उच्चतम स्तर से 10 प्रतिशत से अधिक नीचे कारोबार कर रहा है। डाउ जोन्स 400 अंक से अधिक फिसला, जबकि एसएंडपी 500 में 1.7 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।

हरिप्रसाद ने बताया कि इस बदलाव का मुख्य कारण अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष का समाधान नहीं होना है। कच्चे तेल की कीमतें फिर से 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं, जिससे वैश्विक मुद्रास्फीति की चिंताएं बढ़ गई हैं। भारत के लिए यह विशेष रूप से चिंता का विषय है क्योंकि देश तेल के आयात पर काफी निर्भर है।

एनरिच मनी के सीईओ पोनमुडी आर ने कहा कि अमेरिका-ईरान विवाद वैश्विक निवेशकों के लिए प्रमुख चिंता का कारण बना हुआ है। हाल के संकेतों के बावजूद तनाव बढ़ने का खतरा बना हुआ है, जिससे बाजार भू-राजनीतिक घटनाओं के प्रति संवेदनशील बने हुए हैं।

पोनमुडी ने आगे कहा कि ब्रेंट क्रूड की कीमतें 100 से 107 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल के दायरे में अस्थिर बनी हुई हैं। इससे मुद्रास्फीति, इनपुट लागत और व्यापक आर्थिक दबावों की चिंताएं और बढ़ रही हैं। पश्चिम एशिया में संघर्ष के चलते वैश्विक बाजारों में जोखिम से बचने की प्रवृत्ति मजबूत हुई, जिसके परिणामस्वरूप अमेरिकी शेयर बाजार भी गिरावट के साथ बंद हुए।