आम आदमी पार्टी (AAP) को शुक्रवार को बड़ा झटका लगा, जब राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने पार्टी से अलग होने का ऐलान कर दिया। उन्होंने बताया कि वह अन्य सांसदों के साथ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल होंगे। कुछ ही घंटों बाद चड्ढा, संदीप पाठक और अशोक मित्तल ने औपचारिक रूप से AAP छोड़कर भाजपा का दामन थाम लिया।

बताया जा रहा है कि इस राजनीतिक घटनाक्रम में कुल सात सांसदों के दल-बदल की संभावना है। इनमें हरभजन सिंह, राजिंदर गुप्ता, विक्रम साहनी और स्वाति मालीवाल के नाम भी सामने आए हैं। बाद में विक्रम साहनी और स्वाति मालीवाल ने सोशल मीडिया के जरिए भाजपा में शामिल होने की पुष्टि भी की।

पार्टी के भीतर मतभेद की चर्चा
राघव चड्ढा का यह कदम ऐसे समय आया है, जब हाल ही में उन्हें राज्यसभा में डिप्टी लीडर के पद से हटाया गया था। पार्टी के कुछ नेताओं ने उन पर पार्टी लाइन से अलग रुख अपनाने का आरोप लगाया था, जबकि चड्ढा का कहना है कि उन्हें अपनी बात रखने का मौका नहीं दिया जा रहा था।

दिलचस्प बात यह रही कि अशोक मित्तल, जिन्हें चड्ढा की जगह राज्यसभा में डिप्टी लीडर बनाया गया था, उन्होंने भी पार्टी छोड़कर भाजपा जॉइन कर ली।

राज्यसभा में समीकरण बदलने की संभावना
यदि सभी सात सांसद औपचारिक रूप से पार्टी बदलते हैं, तो राज्यसभा में AAP की स्थिति काफी कमजोर हो सकती है। मौजूदा समय में पार्टी के 10 सांसद हैं और सात के जाने से संख्या घटकर सिर्फ तीन रह सकती है। साथ ही यह संख्या दल-बदल कानून के तहत आवश्यक दो-तिहाई सीमा को भी पार कर सकती है।

पहले से चल रहा था संपर्क
सूत्रों के अनुसार, ये सभी सांसद आपस में लगातार संपर्क में थे और पूरे घटनाक्रम का समन्वय किया जा रहा था। सभी ने अलग-अलग पत्र तैयार कर राज्यसभा सभापति को सौंप दिए थे।

अन्य सांसदों की स्थिति
कुछ सांसद व्यक्तिगत कारणों से उस समय भाजपा मुख्यालय नहीं पहुंच सके। बताया गया कि कोई विदेश में है, कोई संसदीय कार्य में व्यस्त है तो किसी की तबीयत ठीक नहीं थी।

स्वाति मालीवाल और विक्रम साहनी के आरोप
स्वाति मालीवाल ने पार्टी छोड़ने के फैसले के पीछे गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि पार्टी अपने मूल सिद्धांतों से भटक चुकी है और अंदरूनी माहौल ठीक नहीं है। वहीं विक्रम साहनी ने भी अपने राज्य और लोगों की बेहतर सेवा के लिए भाजपा में जाने की बात कही।

AAP की प्रतिक्रिया
इस घटनाक्रम पर AAP नेतृत्व ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। पार्टी प्रमुख अरविंद केजरीवाल समेत अन्य नेताओं ने इसे जनता के साथ विश्वासघात बताया। उनका कहना है कि भाजपा दबाव बनाकर विपक्षी नेताओं को तोड़ने की कोशिश कर रही है।

वहीं पार्टी की ओर से यह भी कहा गया है कि इस मामले में संवैधानिक प्रावधानों के तहत कार्रवाई की मांग की जाएगी।

अंदरूनी बैठकों का दौर
घटनाक्रम के बाद पार्टी के भीतर हलचल तेज हो गई है। शीर्ष नेतृत्व ने स्थिति की समीक्षा के लिए बैठकें शुरू कर दी हैं और आगे की रणनीति पर विचार किया जा रहा है।