शिमला। हिमाचल प्रदेश के किन्नौर जिले में शुक्रवार तड़के हुई भारी बारिश के बाद हालात बिगड़ गए। चोलिंग क्षेत्र में अचानक आई बाढ़ और मलबे के कारण शिमला–रिकांगपिओ राष्ट्रीय राजमार्ग (NH) करीब 30 मीटर तक पूरी तरह अवरुद्ध हो गया। सड़क पर भारी मात्रा में मलबा जमा होने से यातायात लगभग छह घंटे तक बाधित रहा और सुबह करीब 10 बजे मार्ग को आंशिक रूप से बहाल किया जा सका।
इस दौरान सड़क से गुजर रही दो गाड़ियां भी मलबे की चपेट में आ गईं, हालांकि समय रहते वाहन रुक जाने से बड़ा हादसा टल गया। वहीं रिब्बा क्षेत्र में आई बाढ़ के चलते रिब्बा–कंडे संपर्क मार्ग भी वाहनों की आवाजाही के लिए बंद कर दिया गया है।
तीन दिन में 16 करोड़ का नुकसान
राज्य में मानसून की शुरुआत से अब तक करीब 16 करोड़ रुपये के नुकसान का अनुमान लगाया गया है। बीते तीन दिनों में 30.9 मिमी वर्षा दर्ज की गई, जो सामान्य से 106 प्रतिशत अधिक है। किन्नौर में यह बढ़ोतरी और अधिक रही, जहां सामान्य से 423 प्रतिशत ज्यादा बारिश रिकॉर्ड की गई।
लाहौल-स्पीति को छोड़कर राज्य के अधिकांश जिलों में सामान्य से अधिक वर्षा दर्ज की गई है। भारी बारिश, भूस्खलन और बादल फटने की घटनाओं के कारण अभी भी 49 सड़कें और 3 ट्रांसफार्मर बंद पड़े हैं।
बारिश से बढ़ी मौतों की संख्या
राज्य आपातकालीन संचालन केंद्र (SEOC) की रिपोर्ट के अनुसार, भारी बारिश और उससे जुड़ी घटनाओं में मरने वालों की संख्या बढ़कर 14 हो गई है। इनमें सड़क हादसों और प्राकृतिक आपदाओं दोनों तरह की घटनाएं शामिल हैं।
अधिकारियों के मुताबिक, 30 जून से अब तक मौसम संबंधी घटनाओं में 12 लोगों की मौत हुई है, जबकि सड़क दुर्घटनाओं में 2 अन्य लोगों ने जान गंवाई है।
कई जिलों में भारी बारिश का असर
पिछले 24 घंटों में शिमला, मंडी, बिलासपुर और अन्य जिलों में मध्यम से भारी वर्षा दर्ज की गई है। कुछ क्षेत्रों में तापमान में भी उतार-चढ़ाव देखने को मिला है, जिसमें अधिकतम तापमान में 6 डिग्री सेल्सियस तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
मौसम विज्ञान केंद्र शिमला के अनुसार, 5 जुलाई से मानसून की सक्रियता और बढ़ने की संभावना है। इसके साथ ही 12 जुलाई तक कई जिलों में भारी वर्षा का येलो और ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है।
जून में कम बारिश का रिकॉर्ड
इस बार जून महीने में राज्य में 64.9 मिमी वर्षा दर्ज की गई, जो 1901 के बाद से 44वीं सबसे कम बारिश है। यह सामान्य से 36 प्रतिशत कम रही। हालांकि कुछ जिलों में स्थानीय स्तर पर अच्छी बारिश दर्ज की गई, जिसमें मंडी प्रमुख रहा।