शिमला: हिमाचल प्रदेश सरकार ने पिछले तीन वर्षों में 31 जनवरी 2026 तक ऋण और ब्याज अदायगी पर कुल 26,256 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। इस अवधि में सरकार ने सामान्य भविष्य निधि में उपार्जित राशि समेत 35,555 करोड़ रुपये का ऋण लिया। वर्तमान में 31 मई 2026 तक राज्य पर कुल बकाया ऋण 1,01,863 करोड़ रुपये है।
ऋण का विवरण
31 जनवरी 2026 तक पिछले वित्त वर्ष में सरकार ने कुल 11,364 करोड़ रुपये का कर्ज उठाया। इसमें शामिल हैं:
- खुले बाजार से 8,269 करोड़ रुपये
- NABARD से 550 करोड़ रुपये
- बाह्य परियोजनाओं के तहत 117 करोड़ रुपये
- भारत सरकार से ब्याज रहित 2,428 करोड़ रुपये
सामान्य भविष्य निधि से 262 करोड़ रुपये घटाने के बाद वास्तविक कर्ज की राशि 11,102 करोड़ रुपये होती है।
मुख्यमंत्री ने यह जानकारी प्रकाश राणा और अन्य भाजपा विधायकों के प्रश्नों के उत्तर में विधानसभा में प्रस्तुत की।
ऋण और ब्याज अदायगी का वार्षिक खर्च
तीन साल की अवधि में सरकार ने ऋण और ब्याज अदायगी पर सालाना खर्च इस प्रकार किया:
- वर्ष 2023-24: 9,163 करोड़ रुपये
- वर्ष 2024-25: 10,207 करोड़ रुपये
- वर्ष 2025-26 (31 जनवरी तक): 6,886 करोड़ रुपये
पूरा वित्त वर्ष 2025-26 का अनुमानित खर्च 10,933 करोड़ रुपये है। इसके अलावा, अन्य मदों में 1,24,381 करोड़ रुपये शेष रहते हैं।
निगम और बोर्डों की वित्तीय स्थिति
राज्य के कई निगम और बोर्ड घाटे में चल रहे हैं:
- बिजली बोर्ड: 3,390.77 करोड़ रुपये घाटा
- परिवहन निगम: 2,272.24 करोड़ रुपये घाटा
- पावर कारपोरेशन: 976.03 करोड़ रुपये घाटा
- पर्यटन निगम: 147.45 करोड़ रुपये घाटा
वहीं, हिमुडा, सामान्य उद्योग निगम, इलेक्ट्रॉनिक कॉर्पोरेशन, खादी बोर्ड आदि लाभ कमा रहे हैं।
ऋण पर ब्याज का बोझ
25 फरवरी 2026 को लिए गए 1,030 करोड़ रुपये के ऋण पर 7.69% की ब्याज दर लागू है। इस पर हर साल लगभग 79.21 करोड़ रुपये ब्याज देना होता है। सरकारी ऋण का उपयोग किसी विशेष परियोजना या जिले के लिए नहीं बल्कि विभिन्न योजनाओं के वित्तपोषण के लिए किया जाता है।