जम्मू क्षेत्र में किसान तेजी से पारंपरिक खेती से हटकर लीची की हाई डेंसिटी प्लांटेशन (HDP) तकनीक को अपना रहे हैं। अधिक उत्पादन और बेहतर आमदनी की संभावनाओं के कारण यह आधुनिक बागवानी मॉडल किसानों के बीच लोकप्रिय होता जा रहा है।
बागवानी विभाग के अनुसार, एचडीपी तकनीक अपनाने वाले किसान एक कनाल भूमि से सालाना लगभग 24 हजार से 30 हजार रुपये तक की आय अर्जित कर सकते हैं। इसी संभावनाओं को देखते हुए जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने आने वाले वर्षों में 3,200 से अधिक कनाल पारंपरिक लीची बागानों को हाई डेंसिटी प्लांटेशन में बदलने का लक्ष्य रखा है।
जम्मू के बागवानी निदेशक गुल सैयद ने बताया कि लीची किसानों के लिए न सिर्फ लाभकारी फसल साबित हो रही है, बल्कि यह पोषण के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है। इसमें विटामिन-सी, पोटैशियम, प्राकृतिक शर्करा और कई आवश्यक सूक्ष्म पोषक तत्व पाए जाते हैं।
उन्होंने आगे बताया कि सरकार किसानों को लीची की खेती के लिए विभिन्न योजनाओं के तहत 50 प्रतिशत तक सब्सिडी दे रही है। इसके साथ ही उन्हें गुणवत्तापूर्ण पौधे, तकनीकी मार्गदर्शन और विपणन से जुड़ी सहायता भी उपलब्ध कराई जा रही है।
मरह और आरएस पुरा जैसे क्षेत्रों सहित जम्मू शहर के बाहरी इलाकों में सिंचाई सुविधाओं की उपलब्धता के चलते लीची बागानों का तेजी से विस्तार हो रहा है। विभाग किसानों को वैज्ञानिक खेती, बाग प्रबंधन, छंटाई और हाई डेंसिटी प्लांटेशन तकनीक का प्रशिक्षण भी दे रहा है।
अधिकारियों का कहना है कि इन प्रयासों का उद्देश्य बागवानी क्षेत्र को और मजबूत करना तथा किसानों की आय में स्थायी वृद्धि सुनिश्चित करना है।