लखनऊ। प्रदेश में स्कूली बच्चों की सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से परिवहन विभाग ने एक बड़ा विशेष जांच अभियान शुरू करने का निर्णय लिया है। यह अभियान 1 जुलाई से 31 जुलाई तक पूरे प्रदेश में चलाया जाएगा। इसे परिवहन राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दयाशंकर सिंह के निर्देश पर लागू किया जा रहा है।
अभियान का मुख्य उद्देश्य स्कूल बसों में सुरक्षा मानकों का सख्ती से पालन कराना और परिवहन व्यवस्था को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और जवाबदेह बनाना है। जांच के दौरान नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर बसों पर चालान की कार्रवाई की जाएगी, जबकि गंभीर खामियों की स्थिति में बसों को जब्त करने और फिटनेस प्रमाणपत्र निलंबित करने तक की कार्रवाई संभव होगी।
इस विशेष अभियान के तहत स्कूल बसों की तकनीकी स्थिति, फिटनेस और सुरक्षा मानकों की गहन जांच की जाएगी। साथ ही बस चालकों के दस्तावेजों का सत्यापन भी किया जाएगा। बसों की बॉडी स्ट्रक्चर, छत की मजबूती, सीटों की स्थिति, बॉडी-चेसिस माउंटिंग और आपातकालीन निकास जैसे महत्वपूर्ण सुरक्षा बिंदुओं की जांच होगी।
अभियान में यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि प्रत्येक स्कूल बस में निर्धारित क्षमता का कम से कम दो किलोग्राम वाला एबीसी (ड्राई पाउडर) अग्निशामक यंत्र उपलब्ध हो। इसके अलावा केंद्रीय मोटर वाहन नियमों के अनुसार सभी मानकों का पालन अनिवार्य रूप से सुनिश्चित किया जाएगा।
बसों का रंग गोल्डन येलो होना, स्पष्ट रूप से “स्कूल बस” लिखा होना, आपातकालीन निकास द्वार, स्टॉप सिग्नल आर्म और हैजर्ड वार्निंग सिस्टम जैसी सुविधाएं होना जरूरी होगा। बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए बसों की अधिकतम गति सीमा 40 किलोमीटर प्रति घंटा निर्धारित है, जिसका पालन भी जांच के दायरे में रहेगा।
इसके अलावा ब्रेक सिस्टम, टायर, सस्पेंशन, लाइट, इंडिकेटर सहित सभी तकनीकी पहलुओं की भी जांच की जाएगी। साथ ही बसों के आवश्यक दस्तावेज जैसे पंजीकरण प्रमाणपत्र (RC), परमिट, बीमा, प्रदूषण प्रमाणपत्र (PUC) और वैध फिटनेस प्रमाणपत्र की भी बारीकी से जांच होगी।