रांची: झारखंड में सरकारी वाहनों के लंबित चालानों का मामला एक बार फिर चर्चा में है। राज्य के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर को आवंटित सरकारी वाहन (JH01EP-9811) का ओवरस्पीडिंग चालान करीब ढाई साल से जमा नहीं हुआ है।

परिवहन विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार, 31 जुलाई 2023 को इस वाहन पर 1,353 रुपये का चालान कटा था। यह चालान Motor Vehicles Act की धारा 183 के तहत अधिक गति से वाहन चलाने के कारण जारी किया गया था।

कैमरे में कैद हुई अधिक रफ्तार

जानकारी के अनुसार, रांची के डिबडीह पुल के पास लगे स्वचालित ट्रैफिक कैमरे ने वाहन की गति तय सीमा से अधिक दर्ज की थी। उस समय यह वाहन तत्कालीन वित्त मंत्री रामेश्वर उरांव के नाम आवंटित था।

हालांकि चालान ई-चालान के रूप में जारी किया गया, जुर्माना राशि अब तक राज्य सरकार के खाते में जमा नहीं हुई।

मंत्री बदले, लेकिन चालान लंबित

विधानसभा चुनाव के बाद सरकारी वाहन वर्तमान वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर को आवंटित कर दिया गया, लेकिन चालान का लंबित रहना प्रशासनिक ढील को उजागर करता है।

विशेष रूप से यह मामला इसलिए सुर्खियों में है क्योंकि वित्त मंत्री खुद विधानसभा में वित्तीय अनुशासन, पारदर्शिता और जवाबदेही की बात करते रहे हैं। ऐसे में मामूली राशि का चालान भी वर्षों तक लंबित रहना प्रशासनिक प्रक्रिया पर सवाल उठाता है।

पहले भी सामने आ चुका है मामला

इससे पहले कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की की सरकारी गाड़ी का चालान लंबित रहने का मामला भी प्रकाश में आया था। उस प्रकरण में भी आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई थी।

जिम्मेदारी किसकी?

अब सवाल यह है कि सरकारी वाहन का चालान जमा कराने की जिम्मेदारी वाहन चालक, संबंधित विभाग या उस समय के मंत्री कार्यालय की है।

परिवहन विभाग ने इस विषय पर कोई टिप्पणी नहीं की है। लेकिन प्रशासनिक हलकों में चर्चा है कि आम नागरिकों से समय पर चालान वसूला जाता है, तो सरकारी वाहनों में यह ढिलाई क्यों बरती जाती है।

राशि भले ही 1,353 रुपये हो, लेकिन मुद्दा वित्तीय अनुशासन और जवाबदेही का है। अब देखना होगा कि लंबित चालान कब जमा होता है और भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचने के लिए क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं।