असम में जारी चुनाव प्रचार के दौरान झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) पर तीखा हमला किया। उन्होंने कोकराझार जिले के गोसाईंगांव विधानसभा क्षेत्र में आयोजित जनसभा को संबोधित करते हुए प्रत्याशी फ्रेडरिक्सन हांसदा के समर्थन में जनता से वोट देने की अपील की।

‘यह चुनाव अधिकारों की लड़ाई’

अपने संबोधन में सोरेन ने आदिवासी समुदाय के इतिहास और संघर्षों का जिक्र करते हुए कहा कि यह चुनाव केवल सत्ता बदलने का नहीं, बल्कि अधिकारों की रक्षा की लड़ाई है। उन्होंने लोगों से चुनावी प्रलोभनों से सतर्क रहने और शिक्षा को प्राथमिकता देने की अपील की। उनके अनुसार शिक्षा ही समाज को मजबूत और जागरूक बनाने का सबसे प्रभावी माध्यम है।

चाय बागान मजदूरों के मुद्दे पर उठाए सवाल

सोरेन ने अपने भाषण में चाय बागान के मजदूरों की स्थिति का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि देश की अर्थव्यवस्था में इन मजदूरों का महत्वपूर्ण योगदान है, लेकिन उन्हें अब तक उनका उचित अधिकार नहीं मिला। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव के समय लोगों को पैसे और अन्य लालच देकर प्रभावित करने की कोशिश की जाती है, जबकि बाद में उनका शोषण होता है।

झारखंड मॉडल का किया उल्लेख

शिक्षा के मुद्दे पर बोलते हुए मुख्यमंत्री ने झारखंड सरकार की योजनाओं का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि राज्य में सरकारी स्कूलों की व्यवस्था में सुधार हुआ है और बड़ी संख्या में छात्र प्रतियोगी परीक्षाओं में हिस्सा ले रहे हैं। सोरेन ने दावा किया कि झारखंड सरकार आदिवासी छात्रों की उच्च शिक्षा का खर्च भी उठा रही है और ऐसी व्यवस्था असम में भी लागू होनी चाहिए।

संवैधानिक संस्थाओं के दुरुपयोग का आरोप

अपने भाषण के दौरान सोरेन ने कुछ राजनीतिक दलों पर संवैधानिक संस्थाओं के दुरुपयोग का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि जनता को केवल बड़े-बड़े वादों से भ्रमित करने की कोशिश की जाती है, जबकि उनका उद्देश्य सच्चाई को सामने लाना और आने वाली पीढ़ी को शिक्षित और सशक्त बनाना है।