मुंबई। महाराष्ट्र की राजनीति में जारी ‘ऑपरेशन टाइगर’ को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। इस बीच शिवसेना (UBT) नेता आदित्य ठाकरे का बड़ा बयान सामने आया है, जिसमें उन्होंने पार्टी छोड़ने की अटकलों के बीच बागी सांसदों पर तीखा हमला बोला है।
आदित्य ठाकरे ने आरोप लगाया कि कुछ सांसदों ने राजनीतिक लाभ के लिए अपनी वफादारी और भरोसे को पूरी तरह से ताक पर रख दिया है। उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब शिवसेना (UBT) खेमे को बड़ा झटका लगने की चर्चा तेज है और कहा जा रहा है कि पार्टी के 9 में से 6 लोकसभा सांसद एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल हो सकते हैं। साथ ही इन सांसदों द्वारा लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को अलग गुट के गठन की जानकारी देने की बात भी सामने आई है।
आदित्य ठाकरे का कड़ा रुख
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए आदित्य ठाकरे ने इन सांसदों पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने लिखा कि लालच में पाला बदलने वाले नेताओं ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि उनकी निष्ठा और राजनीतिक साख पर सवाल उठना स्वाभाविक है। उन्होंने इस कदम को “बेशर्मी भरा” बताया और सरकार पर पक्षपातपूर्ण रवैये का आरोप भी लगाया।
चुनाव जनादेश पर उठाए सवाल
आदित्य ठाकरे ने आगे कहा कि ये वही सांसद हैं जिन्होंने लोकसभा चुनाव में महाविकास अघाड़ी (MVA) और इंडिया गठबंधन के समर्थन से जीत हासिल की थी। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव के दौरान इन नेताओं ने शिवसेना (UBT), कांग्रेस और एनसीपी (शरद पवार गुट) के नेताओं से अपने पक्ष में प्रचार करने की अपील की थी।
उन्होंने यह भी कहा कि जनता ने इन उम्मीदवारों को गठबंधन की विचारधारा के आधार पर वोट दिया था, लेकिन अब वही नेता निजी हितों के चलते उस जनादेश से दूरी बना रहे हैं।
‘गंदी राजनीति का उदाहरण’ बताया
अपने पोस्ट के अंत में आदित्य ठाकरे ने इस पूरे घटनाक्रम को “गंदी राजनीति का सबसे खराब उदाहरण” करार दिया। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र की जनता इस तरह की राजनीतिक धोखाधड़ी को लंबे समय तक स्वीकार नहीं करेगी।
बैठक से दूरी और गुटबाजी
गौरतलब है कि हाल ही में शिवसेना (UBT) ने दिल्ली में अपने सांसदों की एक अहम बैठक बुलाई थी और व्हिप भी जारी किया गया था। इसके बावजूद 6 सांसद बैठक में शामिल नहीं हुए। केवल तीन सांसद—अरविंद सावंत, अनिल देशाई और राजाभाऊ वाजे—ही बैठक में मौजूद रहे और उन्होंने उद्धव ठाकरे के प्रति अपनी निष्ठा जताई।
उधर, बागी सांसदों का दावा है कि वे पार्टी की विचारधारा में बदलाव और संभावित राजनीतिक विलय की अटकलों के चलते अलग रुख अपना रहे हैं।