चंडीगढ़। पंजाब की सियासत में शिरोमणि अकाली दल (शिअद) ने मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए बड़ा राजनीतिक और धार्मिक विवाद खड़ा कर दिया है। पार्टी अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने मुख्यमंत्री को पद से हटाने के लिए एक महीने का अल्टीमेटम जारी किया है और इस मुद्दे पर पांच सदस्यीय विशेष कमेटी बनाने की घोषणा की है।

सुखबीर बादल ने कहा कि यह कमेटी विभिन्न धार्मिक संगठनों, संत समाज और अन्य संस्थाओं से संवाद कर समर्थन जुटाएगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि श्री अकाल तख्त साहिब सिख समुदाय की सर्वोच्च धार्मिक संस्था है और उसके आदेशों की अनदेखी किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं की जा सकती। उनके अनुसार, मुख्यमंत्री भगवंत मान ने अकाल तख्त के निर्देशों को गंभीरता से नहीं लिया, जिससे सिख भावनाएं आहत हुई हैं।

बादल ने एक विवादित वीडियो प्रकरण का हवाला देते हुए कहा कि मुख्यमंत्री के करीबी रहे जगमन समरा ने इसे सार्वजनिक किया था। उन्होंने बताया कि इस मामले में 21 अक्टूबर 2025 को एफआईआर दर्ज हुई और अगले ही दिन इसे एआई जनरेटेड वीडियो बताने के लिए अदालत का रुख किया गया। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि वीडियो फर्जी था, तो इतनी जल्दी एफआईआर और कानूनी कार्रवाई क्यों की गई।

उन्होंने यह भी दावा किया कि इस मामले को लेकर कई शिकायतें अकाल तख्त साहिब तक पहुंचीं, जिसके बाद मुख्यमंत्री को तलब किया गया। बादल ने आरोप लगाया कि यह पहली घटना नहीं है और पहले भी सरकार पर धार्मिक बेअदबी से जुड़े मामलों को लेकर सवाल उठते रहे हैं।

19 जुलाई तक अल्टीमेटम

सुखबीर बादल ने साफ कहा कि 19 जुलाई तक यदि भगवंत मान को मुख्यमंत्री पद से नहीं हटाया गया, तो शिअद “धर्म युद्ध मोर्चा” शुरू करेगा। उन्होंने अन्य राजनीतिक दलों से भी इस मुद्दे पर एकजुट होने की अपील की और आम आदमी पार्टी के खिलाफ साझा रुख अपनाने की बात कही।

उन्होंने यह भी घोषणा की कि जब तक भगवंत मान मुख्यमंत्री पद पर बने रहेंगे, शिअद के विधायक विधानसभा की कार्यवाही में हिस्सा नहीं लेंगे।

वहीं, वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए बादल ने जांच प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि 24 घंटे के भीतर रिपोर्ट आ जाना कई संदेह पैदा करता है और इस मामले की सीबीआई जांच जरूरी है। शिअद का प्रतिनिधिमंडल जल्द ही इस संबंध में डीजीपी से भी मुलाकात करेगा।