जयपुर। राजस्थान में अब शव सार्वजनिक स्थान पर रखकर विरोध-प्रदर्शन करने वालों को सजा मिलेगी। मरने वाले के स्वजन के साथ नेताओं को भी सजा दी जाएगी। अशोक गहलोत सरकार ने गुरुवार को विधानसभा में इसके लिए विधेयक पारित किया है।

इसमें प्रविधान किया गया है कि यदि कोई स्वजन मरने वाले के शरीर का उपयोग विरोध के लिए करता है तो उसे छह महीने और शव का उपयोग विरोध-प्रदर्शन के लिए करने की अनुमति देने वाले स्वजन को दो साल तक के कारावास की सजा व जुर्माना लगाया जाएगा। साथ ही यदि कोई नेता अथवा गैर स्वजन शव का इस्तेमाल विरोध-प्रदर्शन के लिए करेगा तो उसे पांच साल तक की सजा हो सकती है।

समय पर शव का करना होगा अंतिम संस्कार

विधेयक के प्रविधान के अनुसार मरने वाले के शव का समय पर अंतिम संस्कार करना होगा। अंतिम संस्कार में देरी तब ही की जा सकेगी, जब स्वजन घर के बाहर से आने वाले हों या पोस्टमार्टम करवाना हो। किसी भी व्यक्ति की मौत होने पर उसके स्वजन द्वारा शव कब्जे में नहीं लेने पर एक साल तक की सजा भुगतने के साथ ही जुर्माना का भी प्रविधान किया गया है।

इस मौके पर शव को कब्जे में ले सकते हैं अधिकारी

साथ ही यदि किसी पुलिस अधिकारी अथवा अन्य अधिकारी को यह लगता है कि शव का इसतेमाल स्वजन या नेता विरोध-प्रदर्शन के लिए कर सकते हैं तो वह उसे कब्जे में ले सकेंगे, लेकिन उन्हें इसकी सूचना एसडीएम को देनी होगी। एसडीएम शव के अंतिम संस्कार के लिए स्वजन को नोटिस भेजेंगे । इसके बाद भी स्वजन शव का अंतिम संस्कार नहीं करते हैं तो प्रशासन अपने स्तर पर कर सकेंगे ।

लावारिस शवों का जिलेवार डिजिटल डाटा बैंक बनाएगी सरकार

लावारिस शवों को डीप फ्रीजर में रखना होगा। राज्य सरकार लावारिस शवों का जिलेवार डिजिटल डाटा बैंक बनाएगी।भाजपा ने मीसा कानून से तुलना की बहस के बाद विधेयक पारित हो गया। अब यह कानून बनेगा। इस बीच भाजपा विधायकों ने बहस के दौरान इसकी तुलना आपातकाल के मीसा कानून से की है। प्रतिपक्ष के नेता राजेंद्र राठौड़ ने कहा कि सरकार आवाज को दबाने वाला कानून लेकर आई है। इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

इस पर संसदीय कार्यमंत्री शांति धारीवाल ने विपक्ष की आपत्तियां खारिज करते हुए कहा कि शव रखकर धरने-प्रदर्शन करना और नौकरी व पैसों की मांग करने की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। साल 2019 से लेकर 2023 तक 306 घटनाएं हो चुकी हैं। ये कानून नहीं लाते तो यह आंकड़ा और बढ़ता।