अजमेर दरगाह में हिंदू शिव मंदिर होने के दावे के मामले में न्यायालय में कल सुनवाई होगी। वाद दायर करने वाले हिन्दू सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष विष्णु गुप्ता कल होने वाली सुनवाई के लिए गुरुवार को अजमेर पहुंचे, जहां उन्होंने कहा कि न्यायालय में कल होने वाली सुनवाई को लेकर वह अपना पक्ष रखेंगे और दरगाह कमेटी, अल्पसंख्यक मामलात मंत्रालय और पुरातत्व विभाग द्वारा पेश किए गए जवाब का न्यायालय में तथ्यों के आधार पर जवाब पेश करेंगे और दरगाह में सर्वे की मांग न्यायालय के समक्ष रखेंगे। विष्णु गुप्ता ने कहा कि वरशिप एक्ट अजमेर दरगाह पर लागू नहीं होता है, अगर प्रतिवादियों की ओर से न्यायालय मे 1991 वरशिप एक्ट का हवाला दिया गया तो वह न्यायालय को कानून के आधार पर बताएंगे, गुप्ता ने कहा कि दरगाह में मंदिर होने के दावे को लेकर वह पहले ही न्यायालय में अहम दस्तावेज पेश कर चुके हैं और वह न्यायालय से कल होने वाली सुनवाई में सर्वे की मांग रखेंगे।

ख्वाजा गरीब नवाज की दरगाह में हिंदू शिव मंदिर होने का दावा मामले में कल 20 दिसंबर को अजमेर न्यायालय में सुनवाई होनी है। इस सुनवाई से पहले वादी हिंदू सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष विष्णु गुप्ता की मौजूदगी की में सनातन धर्म रक्षा संघ के मंच पर प्रेस वार्ता का आयोजन किया गया। इसमें बताया गया कि वह विष्णु गुप्ता के साथ है और उन्हें दस्तावेजों के साथ ही हर तरह की मदद दी जाएगी। वहीं हिन्दू सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष विष्णु गुप्ता ने कहा कि हमें न्याय पर पूरा विश्वास है और दस्तावेजों के साथ हम अपना पक्ष रखेंगे उन्होंने कहा कि वरशिप एक्ट इस मामले में लागू नहीं होता और हमारे अधिवक्ता अपना पूरा पक्ष इस मामले में रखेंगे। 

उन्होंने कहा कि 1200 ईस्वी में यहां शिव मंदिर हुआ करता था, जिससे मुस्लिम आतताईयों द्वारा तोड़कर मजार बनाई गई, इसका दावा किया गया है। उन्होंने कहा कि दरगाह केवल मजार है और यह किसी धार्मिक स्थल की श्रेणी में नहीं आती जो पूजा के स्थान होते है, वही वरशिप एक्ट में लागू होगा।

उन्होंने कहा कि उर्स मेले के दौरान राज्यों के मुख्यमंत्री देश के प्रधानमंत्री सहित अलग-अलग देश की प्रतिनिधि यहां आते हैं और चादर पेश करते हैं ऐसे में उन्होंने कहा कि यहां कोई भी ख्वाजा गरीब नवाज की दरगाह में आस्था रखें और माता ठेके और चादर पेश करें इससे हमें मतलब नहीं लेकिन हमें संविधान पर पूरा भरोसा है। उन्होंने अलग-अलग किताबों का हवाला देते हुए अपनी जानकारी भी और बताया कि किस तरह से यहां पर मंदिर मजार में बदला गया। और यहां के कई लोग यह भी बताते हैं कि यहां पहले घंटी बजती थी और कई बुजुर्ग दरगाह में जल अर्पण भी करने जाते थे, इन सभी को लेकर आम जनता और हिंदुओं की आस्था भी जुड़ी है। 

उल्लेखनीय है कि अजमेर दरगाह में हिंदू मंदिर होने के दावे के मामले में अजमेर की निचली अदालत ने तीन प्रतिवादियों को नोटिस जारी किए हैं, उन नोटिस के जवाब को लेकर कल तारीख निर्धारित की गई है, जहां पर प्रतिवादियों को अपना पक्ष न्यायालय के समक्ष रखना होगा।