नागौर जिले के मेड़ता उपखंड के कड़वासरा की ढाणी में शनिवार को एक ऐसा दृश्य देखने को मिला जिसने पूरे गांव को भावविभोर कर दिया। शौर्य चक्र विजेता शहीद भागीरथ कड़वासरा की बेटी सुष्मिता की शादी में भारतीय सेना की 13 ग्रेनेडियर्स बटालियन के 24 जवान पिता की भूमिका निभाने के लिए उपस्थित हुए। यह समारोह केवल पारिवारिक उत्सव नहीं रहा, बल्कि फौजी भाईचारे, कर्तव्यनिष्ठा और वचनबद्धता का जीवंत उदाहरण बन गया।
वर्षों पुराना वादा पूरा हुआ
13 ग्रेनेडियर्स (गंगानगर–जैसलमेर सेक्टर) की 24 जवानों की टीम खास तौर पर नागौर पहुँची। कमान अधिकारी कर्नल सोमेन्द्र कुमार, अन्य वरिष्ठ अधिकारी और सेवानिवृत्त कर्नल सुरेश चंद्र राणा भी समारोह में मौजूद रहे। जवानों ने सुष्मिता को गोद में बिठाया, कन्यादान की रस्म पूरी की, फेरे कराए और आशीर्वाद दिया। विदाई के समय जवानों और ग्रामीणों की आंखें नम थीं और माहौल गर्व और सम्मान से भर गया।
ग्रामीणों ने इसे फौजी वचनबद्धता का अद्वितीय उदाहरण बताया। एक ग्रामीण ने कहा, “आज के समय में लोग वादे निभाने से कतराते हैं, लेकिन सेना ने दिखा दिया कि वचन का क्या महत्व है।”
शहीद जवान की वीर गाथा
भागीरथ कड़वासरा का जन्म 10 जनवरी 1978 को इसी गांव में हुआ। उन्होंने 1995 में भारतीय सेना की 13 ग्रेनेडियर्स में भर्ती लिया और 8 जून 2002 को असम के मिलनपुर गांव में आतंकवादियों से मुकाबले में अदम्य साहस दिखाते हुए वीरगति को प्राप्त हुए। उनकी बहादुरी के लिए 26 मार्च 2003 को मरणोपरांत शौर्य चक्र से सम्मानित किया गया।
उनके पीछे पत्नी संतोष देवी और नन्ही बेटी सुष्मिता रह गई थीं। शहीद के साथियों ने उस समय वादा किया था कि वे सुष्मिता की हर खुशी में उसका साथ देंगे। शनिवार को यह वादा साकार हुआ।
मां की आंखों में गर्व और भावुकता
संतोष देवी ने कहा, “भागीरथ भले ही हमारे साथ नहीं हैं, लेकिन उनके साथी आज भी परिवार की तरह हमारे साथ खड़े हैं।” उनकी आंखों में आंसू थे, लेकिन चेहरे पर गर्व भी साफ झलक रहा था।
फौजी परंपरा का प्रतीक
जवानों ने एक स्वर में कहा कि शहीद साथी से किया गया वादा हमेशा जीवित रहेगा। यह आयोजन केवल शादी नहीं बल्कि फौजी भाईचारे और कर्तव्यनिष्ठा की परंपरा का प्रतीक बनकर सामने आया, जिसमें रक्त संबंधों से आगे बढ़कर निभाया गया वचन अहम होता है।