राजस्थान के बीकानेर में बन रही सबसे लंबी दीवार न सिर्फ इस शहर के लिए गौरव का कारण बनेगी, बल्कि हजारों पशु और वन्य जीवों के साथ लाखों पेड़ों की सुरक्षा का आधार भी होगी। गोचर के रूप में विख्यात इस 27 हजार बीघा जमीन को चारों तरफ से सुरक्षित करने के लिए बन दीवार बनाने में इन दिनों सौ से ज्यादा मजदूर जुटे हुए हैं। दैनिक भास्कर ने इस गोचर काे ड्रोन से देखा तो नित नए उगते मकानों के जंगल के उस पार यह हिस्सा शांत और वीरान नजर आया। एक सेंचुरी का आभास कराते इस गोचर में आज पांच हजार से ज्यादा हिरण दिनभर किलोल करते हुए छलांगें मारते हैं।
मुरलीधर व्यास नगर और इस गोचर के बीच महज एक चालीस फीट की सड़क का अंतर है। सड़क के उस पार सिर्फ जंगल नजर आता है। हालांकि आसपास किसी ने मंदिर बना दिया है तो किसी ने समाधि जैसे स्वरूप भी स्थापित किए हैं। कहीं कहीं मकानों की नींव भी नजर आती है। इसके बाद दूर तक इस अघोषित सेंचुरी में वन्य जीवन दिखते हैं। शहर की तरफ से गोचर में प्रवेश करने के पांच सौ मीटर बाद ही सांप, सफेद चूहे, गिलहरी नजर आती है तो कुछ किलोमीटर चलने पर हिरण भी विचरण करते दिख जाते हैं।
एक अनुमान के मुताबिक यहां करीब पांच हजार हिरण है। खरगोश की संख्या भी हजारों में है। सेंचुरी में जगह-जगह इन वन्य जीवों के लिए पीने के पानी की व्यवस्था है। जहां कभी लोग टैंकर से पानी डलवाते थे, लेकिन अब यहां पानी की सप्लाई हो गई है। बारह महीने वन्य जीवों को यहां पानी मिलता है।
कब्जों से बचाने की कोशिश
इस गोचर के आसपास लोगों ने कब्जे करने शुरू कर दिए थे। ऐसे में पर्यावरण प्रेमी बृजनारायण किराडू और पूर्व मंत्री देवी सिंह भाटी ने चार दीवारी बनाने का निर्णय किया। भाटी के प्रयास से ही इसका निर्माण हो रहा है। स्वयं भाटी हर रोज यहां आकर व्यवस्थाओं को संभालते हैं। उनकी टीम के सदस्य देवकिशन चांडक, विजय उपाध्याय आदि यहां एक एक ईंट का हिसाब रख रहे हैं।
जो कहा वो पत्थर पर लकीर
इस बारे में देवी सिंह भाटी से दैनिक भास्कर ने बातचीत की तो उन्होंने कहा कि कितनी दीवार बनेगी, कितना का काम होगा, ये सब ऊपर वाले के हाथ में है। हम कोशिश कर रहे हैं। उन्हें जब बताया कि पर्यावरण प्रेमी बृजनारायण किराडू ने चालीस किलोमीटर दीवार बनने की बात कही है तो भाटी ने कहा किराडूजी ने जो कहा, वो पत्थर पर लकीर है।
जहां कब्जा, वहां प्राथमिकता
इस काम से जुड़े भाजपा नेता विजय उपाध्याय ने बताया कि गोचर का क्षेत्र करीब चालीस किलोमीटर में फैला हुआ है। अभी उन क्षेत्रों में दीवार तत्परता से बन रही है, जहां कब्जे होने की आशंका है। जैसे-जैसे आगे बढ़ेंगे, दीवार बनती जायेगी। कई जगह दीवार न बन सकी तो फैंसिंग की जायेगी, ताकि गोचर पूरी तरह से सुरक्षित हो सके।