पश्चिम एशिया में जारी तनावपूर्ण हालात के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को देश के विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ अहम बैठक की। इस बैठक में क्षेत्र में चल रहे संघर्ष का भारत की ऊर्जा आपूर्ति और आर्थिक स्थिति पर संभावित प्रभाव को लेकर चर्चा की जा रही है।

इससे पहले केंद्र सरकार ने देशवासियों को आश्वस्त करते हुए कहा कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बावजूद भारत के सामने फिलहाल किसी प्रकार का तात्कालिक संकट नहीं है। सरकार के मुताबिक देश में लगभग 60 दिनों के लिए पर्याप्त ईंधन का भंडार मौजूद है, इसलिए घबराने या अफवाहों पर ध्यान देने की जरूरत नहीं है।

सरकार ने स्पष्ट किया कि देश की ऊर्जा आपूर्ति पूरी तरह स्थिर है और इसे व्यवस्थित तरीके से प्रबंधित किया जा रहा है। मौजूदा मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त भंडार उपलब्ध है। नागरिकों से अपील की गई है कि ईंधन की कमी से जुड़ी अटकलों या भ्रामक खबरों पर भरोसा न करें।

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अनुसार, आने वाले करीब दो महीनों के लिए कच्चे तेल की आपूर्ति पहले ही सुनिश्चित कर ली गई है। सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों ने समय रहते आयात की व्यवस्था कर ली है, जिससे देश में ईंधन की आपूर्ति लगातार बनी रहेगी।

सरकार ने यह भी बताया कि भले ही होर्मुज जलडमरूमध्य में किसी प्रकार की रुकावट की आशंका हो, लेकिन भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए किसी एक क्षेत्र पर निर्भर नहीं है। वर्तमान में देश 40 से अधिक देशों से कच्चा तेल आयात कर रहा है, जिससे आपूर्ति में विविधता बनी रहती है और जोखिम कम हो जाता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि ऊर्जा स्रोतों के विविधीकरण और पहले से की गई आयात व्यवस्था के कारण मौजूदा परिस्थितियों में भारत की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत बनी हुई है।