राजस्थान: समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने की दिशा में भजनलाल सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट की पूर्व न्यायाधीश रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया है, जो “राजस्थान यूनिफॉर्म सिविल कोड-2026” का प्रारूप तैयार करेगी। इससे पहले 14 अप्रैल को हुई कैबिनेट बैठक में UCC लागू करने के प्रस्ताव पर सैद्धांतिक सहमति बन चुकी थी, जिसके बाद अब सरकार ने इस प्रक्रिया को आगे बढ़ा दिया है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि भाजपा लंबे समय से UCC को अपने वैचारिक एजेंडे का अहम हिस्सा मानती रही है। उत्तराखंड के बाद अब राजस्थान में इस दिशा में की गई यह पहल पार्टी के लिए एक बड़ा राजनीतिक संकेत मानी जा रही है, जिससे वह अपने कोर वोट बैंक को मजबूत संदेश देना चाहती है।
प्रस्तावित UCC में क्या हो सकते हैं बदलाव
प्रारंभिक रूप से तैयार किए जा रहे ढांचे में विवाह और तलाक का अनिवार्य पंजीकरण, बहुविवाह पर रोक, लिव-इन रिलेशनशिप का रजिस्ट्रेशन और बेटा-बेटी को संपत्ति में समान अधिकार जैसे प्रावधान शामिल हो सकते हैं। हालांकि सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि आदिवासी समुदायों की परंपराओं और संवैधानिक अधिकारों का पूरा सम्मान किया जाएगा और उन्हें सुरक्षा प्रदान की जाएगी।
2028 चुनाव से पहले बड़ा राजनीतिक कदम
राजस्थान में अगले विधानसभा चुनाव 2028 में प्रस्तावित हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि राज्य सरकार विकास कार्यों के साथ-साथ वैचारिक मुद्दों को भी राजनीतिक विमर्श के केंद्र में लाने की रणनीति पर काम कर रही है। UCC को भाजपा और संघ परिवार लंबे समय से एक प्रमुख एजेंडा मानते रहे हैं, जिसे राम मंदिर, धारा 370 और तीन तलाक जैसे फैसलों की कड़ी में देखा जा रहा है।
सरकार का दावा है कि समान नागरिक संहिता समाज में समानता बढ़ाने, महिलाओं को समान अधिकार देने और व्यक्तिगत कानूनों में मौजूद असमानताओं को दूर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
विपक्ष की प्रतिक्रिया और राजनीतिक बहस
यह कदम राजनीतिक रूप से कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के लिए नई चुनौती पैदा कर सकता है। भाजपा इसे “समान न्याय” और “महिला अधिकार” के मुद्दे के रूप में पेश कर रही है, जिससे सीधा विरोध करना विपक्ष के लिए आसान नहीं होगा। वहीं आलोचकों का कहना है कि सरकार इस तरह के वैचारिक मुद्दों के जरिए बेरोजगारी, महंगाई और स्थानीय प्रशासनिक समस्याओं से ध्यान भटकाने की कोशिश कर सकती है।
जनसंवाद के जरिए सुझाव लेने की तैयारी
सरकार ने गठित समिति को राज्य के विभिन्न संभागों में जनसंवाद कार्यक्रम आयोजित करने और आम लोगों से सुझाव जुटाने की जिम्मेदारी भी दी है। इससे सरकार यह संदेश देना चाहती है कि UCC का प्रारूप किसी एक वर्ग के लिए नहीं, बल्कि व्यापक सामाजिक परामर्श के आधार पर तैयार किया जाएगा।