लखनऊ। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने मंगलवार को सपा मुख्यालय में प्रेस वार्ता कर भाजपा पर बड़ा आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि उन्हें विभिन्न जिलों से लगातार सूचनाएं मिल रही हैं कि फॉर्म-7 के जरिये मतदाता सूची में गंभीर गड़बड़ी की जा रही है। अखिलेश के मुताबिक इस पूरी प्रक्रिया से जुड़ी ठोस जानकारियां उनके पास मौजूद हैं और इसकी निष्पक्ष जांच जरूरी है।
उन्होंने मांग की कि प्रत्येक फॉर्म पर क्रम संख्या अनिवार्य की जाए और अब तक जमा किए गए सभी फॉर्मों की दोबारा जांच हो। अखिलेश ने कहा कि इस प्रक्रिया में आधुनिक तकनीक और एआई का इस्तेमाल कर यह पता लगाया जाना चाहिए कि कहां और कैसे गलत तरीके से नाम हटाए गए हैं। उन्होंने बताया कि सबसे पहले ऐसी शिकायतें सीतापुर से सामने आई हैं।
फॉर्म-7 से नाम हटाने का आरोप
अखिलेश यादव ने कहा कि भाजपा को पहले से अंदाजा हो गया था कि किन विधानसभा क्षेत्रों में उनके वोट घटने वाले हैं, इसलिए अब एक नई रणनीति अपनाई गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि फॉर्म-7 के जरिए चुनिंदा मतदाताओं के नाम जानबूझकर सूची से हटाए जा रहे हैं और इस काम में कुछ कर्मचारियों की भूमिका भी संदिग्ध है।
उन्होंने दावा किया कि इस प्रक्रिया में सबसे ज्यादा प्रभावित मुस्लिम और पीडीए वर्ग के मतदाता हो रहे हैं, जिनके नाम बड़ी संख्या में मतदाता सूची से हटाए जा रहे हैं।
चुनाव आयोग से हस्तक्षेप की मांग
सपा प्रमुख ने कहा कि विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान यह एक सुनियोजित प्रयास लगता है, जिसका मकसद खास समुदायों और पीडीए वर्ग के मताधिकार को कमजोर करना है। उन्होंने चुनाव आयोग से इस मामले में तुरंत हस्तक्षेप कर कार्रवाई की मांग की।
अखिलेश ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि पार्टी की अंदरूनी स्थिति खराब है। हार के डर से वहां आपसी खींचतान, गुटबाजी और अस्थिरता बढ़ गई है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि भाजपा के अपने सहयोगी भी अब उससे दूरी बनाने लगे हैं और कई जगह पार्टी के झंडे उतरने लगे हैं।