बरेली में धर्मांतरण गिरोह से जुड़े करेली का मदरसा भी जांच में अवैध पाया गया है। इससे पहले फैजनगर का मदरसा रिकॉर्ड के अभाव में संदिग्ध था। पुलिस दोनों मदरसों की कमेटियों के सदस्यों की पहचान में जुटी है।

दस दिन पहले एसपी दक्षिणी अंशिका वर्मा ने धर्मांतरण मामले में चार आरोपियों को कोर्ट में पेश किया था, जिन्हें जेल भेज दिया गया। अलीगढ़ निवासी अखिलेश कुमारी ने भुता थाने में शिकायत दर्ज कराई थी कि फैजनगर के मदरसे से उनके जन्मांध बेटे को दूसरी शादी का झांसा देकर धर्म परिवर्तन कराया जा रहा था।

फैजनगर मदरसा संचालक अब्दुल मजीद, सुभाषनगर के करेली निवासी सलमान, मोहम्मद आरिफ और सैदपुर चुन्नीलाल भोजीपुरा निवासी मोहम्मद फईम को जेल भेजा गया था। अल्पसंख्यक विभाग ने फैजनगर का मदरसा अवैध पाया था। अब करेली का मदरसा भी रिकॉर्ड के अभाव में संदिग्ध है, इसे आरिफ चला रहा था, जबकि उसका सहयोगी ब्रजपाल पहले ही धर्म परिवर्तन कर चुका है।

धर्मांतरण मामले के पांचवें आरोपी महमूद बेग को पुलिस अब तक गिरफ्तार नहीं कर पाई है। पुलिस उसे वांछित बताती है, जबकि उसकी पत्नी ने हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दाखिल कर आरोप लगाया कि 20 अगस्त को पुलिस उसे हिरासत में ले गई थी और डर है कि उनका एनकाउंटर हो सकता है।

इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति जफीर अहमद और सलिल कुमार राय ने पुलिस से इस मामले में जानकारी मांगी है। एसएसपी अनुराग आर्य ने बताया कि सीओ तृतीय पंकज श्रीवास्तव की टीम महमूद बेग की तलाश में लगी हुई है।

इस बीच हाफिज आकिल को पुलिस ने जांच के बाद निर्दोष पाए जाने पर छोड़ दिया। जमीयत उलमा के राष्ट्रीय सचिव नियाज अहमद फारुकी ने बताया कि दोनों आरोपियों के परिजन संगठन अध्यक्ष महमूद मदनी से मिले थे।

एसपी दक्षिणी अंशिका वर्मा ने बताया कि जिले में 425 मदरसे वैध हैं, जबकि बाकी बिना पंजीकरण के संचालित हो रहे हैं। जल्द ही शेष आरोपियों की गिरफ्तारी की कार्रवाई की जाएगी।