उत्तर प्रदेश: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राम मंदिर चढ़ावा अनियमितता मामले पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि सरकार किसी भी स्थिति में जनभावनाओं और धार्मिक आस्था के साथ खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं करेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि विशेष जांच दल (एसआईटी) की रिपोर्ट सामने आते ही कार्रवाई शुरू कर दी गई है और पूरे मामले में सच्चाई को सामने लाया जाएगा।

देवरिया में 456 करोड़ रुपये से अधिक लागत की विभिन्न विकास परियोजनाओं के लोकार्पण और शिलान्यास कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार शुरू से ही निष्पक्ष जांच के पक्ष में रही है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि मामले की गहन जांच होगी और जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।

अपने संबोधन के दौरान मुख्यमंत्री ने विपक्षी दलों पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि कुछ राजनीतिक दल वर्षों तक राम मंदिर निर्माण का विरोध करते रहे और न्यायालय में इसके खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ते रहे। वहीं कुछ ऐसे भी रहे जिन्होंने भगवान राम के नाम पर होने वाले आयोजनों और धार्मिक कार्यक्रमों का विरोध किया।

योगी आदित्यनाथ ने कहा कि आज वही लोग मंदिर और आस्था की बात कर रहे हैं, जिन्होंने अतीत में धार्मिक आयोजनों को लेकर अलग रुख अपनाया था। उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्ववर्ती सरकारों के दौर में कई धार्मिक आयोजनों और यात्राओं को लेकर बाधाएं खड़ी की जाती थीं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि किसी के पास मामले से जुड़े ठोस प्रमाण हैं तो उन्हें जांच एजेंसियों और एसआईटी के समक्ष प्रस्तुत करना चाहिए। बिना तथ्यों के लगाए जाने वाले आरोपों से केवल भ्रम की स्थिति पैदा होती है। उन्होंने लोगों से अपील की कि जांच पूरी होने तक अनावश्यक बयानबाजी से बचें।

अपने भाषण में मुख्यमंत्री ने बिना किसी का नाम लिए दिल्ली की राजनीति पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि कुछ नेताओं को लंबे समय तक शासन का अवसर मिला, लेकिन वे अपेक्षित विकास नहीं कर सके। उन्होंने दावा किया कि जिस प्रकार भाजपा सरकार ने अयोध्या में विकास कार्यों को गति दी है, उसी तरह अन्य राज्यों और शहरों में भी विकास संभव है यदि शासन की प्राथमिकता जनता के हित हों।