लखनऊ में आयकर विभाग की जांच रिपोर्ट में जौहर ट्रस्ट से जुड़ी कई गंभीर अनियमितताओं का खुलासा हुआ है। 147 पेज की विस्तृत रिपोर्ट के आधार पर विभाग ने ट्रस्ट का रजिस्ट्रेशन रद्द कर दिया है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ट्रस्ट पर पूर्ण नियंत्रण आजम खां और उनके परिवार का था, जबकि अन्य ट्रस्टी केवल नाममात्र की भूमिका में थे।
ट्रस्ट पर परिवार के नियंत्रण का आरोप
रिपोर्ट के अनुसार जौहर ट्रस्ट के नौ सदस्यों में से पांच सदस्य आजम खां के परिवार से जुड़े थे। जांच में एक ट्रस्टी चौधरी शहरयार सलीम ने स्वीकार किया कि उन्हें केवल औपचारिक रूप से ट्रस्टी बनाया गया था और वास्तविक निर्णय लेने में उनकी कोई भूमिका नहीं थी। उन्होंने यह भी बताया कि ट्रस्ट की बैठकों में उनसे केवल हस्ताक्षर कराए जाते थे।
निर्माण कार्य में सरकारी धन के दुरुपयोग का आरोप
आयकर विभाग की जांच में यह भी सामने आया कि कई सरकारी ठेकेदारों ने स्वीकार किया है कि उन्हें मिली परियोजना राशि का लगभग 30 से 40 प्रतिशत हिस्सा जौहर यूनिवर्सिटी के निर्माण कार्य में लगाया गया। जिला मूल्यांकन अधिकारी की रिपोर्ट के अनुसार विश्वविद्यालय परिसर में बनी 59 इमारतों की अनुमानित लागत करीब 494.46 करोड़ रुपये है, जिसका कोई स्पष्ट हिसाब ट्रस्ट के रिकॉर्ड में नहीं मिला।
निजी कंपनियों और फर्जी लेनदेन की जांच
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि कुछ निजी निर्माण कंपनियों को सरकारी ठेके दिलाकर उनसे ट्रस्ट की संपत्तियों का निर्माण कराया गया। जौहर एसोसिएट्स और सीके एसोसिएट्स पर लगभग 86 करोड़ रुपये के सरकारी फंड के दुरुपयोग का आरोप है, जिसका कोई ठोस लेखा-जोखा उपलब्ध नहीं है।
दान और फर्जी संस्थाओं पर सवाल
जांच में पाया गया कि ट्रस्ट ने जिन कई दानदाताओं का उल्लेख किया था, उनका वास्तविक अस्तित्व नहीं मिला। इसमें लखनऊ, दिल्ली, नोएडा, मुरादाबाद और अन्य शहरों की कई कंपनियां और संस्थाएं शामिल हैं। इसके अलावा 11 ऐसी संस्थाओं से दान दिखाया गया, जो जांच में अस्तित्वहीन पाई गईं।
राजनीतिक गतिविधियों और संपत्ति उपयोग पर आरोप
रिपोर्ट के अनुसार ट्रस्ट परिसर का उपयोग राजनीतिक गतिविधियों के लिए भी किया जाता था। एक सहायक वित्त अधिकारी के बयान में यह स्वीकार किया गया कि परिसर का एक हिस्सा समाजवादी पार्टी के कार्यालय के रूप में इस्तेमाल होता था, लेकिन इसके लिए कोई किराया नहीं लिया गया। इसके अलावा शैक्षणिक भूमि पर मस्जिद निर्माण को भी नियमों के उल्लंघन के रूप में दर्ज किया गया है।
खातों में बड़ा अंतर और ऑडिट पर सवाल
जांच में आय-व्यय खातों और बैंक जमा राशि के बीच भारी अंतर पाया गया। उदाहरण के तौर पर वित्त वर्ष 2020-21 में जहां आय 12.83 करोड़ रुपये दर्ज की गई, वहीं बैंक जमा 27.39 करोड़ रुपये पाया गया। ऑडिटर ने भी स्वीकार किया कि रिपोर्ट बिना पर्याप्त दस्तावेजों (बिल और वाउचर) के तैयार की गई थी।