संसद में जस्टिस जसवंत सिंह आयोग की रिपोर्ट के संबंध में केंद्रीय विधि मंत्री किरण रिजिजू की ओर से दिए बयान की अधिवक्ताओं ने निंदा की है। बयान से आक्रोशित अधिवक्ता बुधवार को न्यायिक कार्य से विरत रहकर आंदोलन की हुंकार भरेंगे। दीवानी परिसर में प्रभात फेरी निकाल प्रदर्शन करेंगे। जल्द आगरा-अलीगढ़ मंडल के अधिवक्ताओं की बैठक कर अगली रणनीति तय की जाएगी।
हाईकोर्ट खंडपीठ स्थापना संघर्ष समिति की बैठक मंगलवार को आगरा बार एसोसिएशन के पुस्तकालय कक्ष में हुई। इसमें समिति संयोजक प्रवीन श्रीवास्तव, अशोक भारद्वाज व दुर्गविजय सिंह भैया ने कहा कि संसद में केंद्रीय विधि मंत्री द्वारा दिया गया बयान किसी राजनीतिक पूर्वाग्रह से ग्रस्त प्रतीत होता है। आगरा बार के सचिव शिशुपाल सिंह कंसाना, संघर्ष समिति के सचिव हेमंत भारद्वाज, वीरेंद्र फौजदार ने कहा कि आगरा की राजनीति शक्ति के अभाव में खंडपीठ बेंच की स्थापना का मामला अघर में लटका हुआ है। कहा कि संसद और विधानसभा के चालू सत्र में जनप्रतिनिधियों को खंडपीठ स्थापना की पहल करनी चाहिए। नहीं तो अधिवक्ता आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। बैठक में वरिष्ठ अधिवक्ता अनिल तिवारी राजीव कुलश्रेष्ठ, सत्यप्रकाश सिंह, अनूप शर्मा, अधर शर्मा, विजय गुप्ता, हरिओम शर्मा, रूपेश भारद्वाज, योगेश कुलश्रेष्ठ, देवेश शर्मा, सुरेन्द्र सिंह पप्पू, आनंद शर्मा आदि थे।
केंद्र सरकार को बेंच स्थापना का अधिकार
वरिष्ठ अधिवक्ता देवेंद्र वाजपेयी और अविनाश शर्मा ने कहा कि जस्टिस जसवंत सिंह आयोग की रिपोर्ट में साफ अंकित है कि हाईकोर्ट खंडपीठ स्थापना का अधिकार केंद्र सरकार को है। ऐसे में राज्य सरकार से किसी भी प्रकार की सहमति की कोई आवश्यकता नहीं है। उन्होंने कहा कि केंद्रीय मंत्री ने आगरा में मुलाकात के दौरान आयोग की रिपोर्ट का समर्थन किया था, अब इस तरह का बयान उन्हें नहीं देना चाहिए।