नई दिल्ली। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते पर चल रही बातचीत में "बहुत महत्वपूर्ण" प्रगति हुई है। वहीं, नई दिल्ली यूरोपीय संघ के साथ अपने मेगा मुक्त व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया में भी स्थिर गति बनाए हुए है।
सूत्रों ने स्पष्ट किया कि यूरोपीय संघ के साथ भारत के व्यापार समझौते को अमेरिका के साथ संबंधों में संतुलन बनाने के प्रयास के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। अमेरिकी बाजार भारतीय निर्यातकों के लिए उतना ही अहम है। दोनों पक्ष व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के करीब हैं और वार्ता सकारात्मक परिणाम की ओर बढ़ रही है।
सूत्रों के अनुसार, यूरोपीय संघ के समझौते के अंतिम चरण में भी भारतीय वार्ताकार अमेरिकी समकक्षों के संपर्क में थे। एक अधिकारी ने कहा, “काम जारी है और हमें उम्मीद है कि इसका सकारात्मक नतीजा सामने आएगा।”
विदेश मंत्री जयशंकर की वॉशिंगटन यात्रा
सूत्रों ने यह भी बताया कि विदेश मंत्री एस. जयशंकर अगले सप्ताह वॉशिंगटन का दौरा करेंगे। वहां वह अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो की मेजबानी में होने वाली महत्वपूर्ण खनिजों पर बैठक में हिस्सा लेंगे। अमेरिकी विदेश विभाग के अनुसार, यह बैठक दुनिया भर के साझेदार देशों के साथ खनिज आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत, सुरक्षित और भरोसेमंद बनाने के उद्देश्य से आयोजित की जा रही है। ये खनिज अमेरिका की आर्थिक सुरक्षा, तकनीकी नेतृत्व और ऊर्जा संक्रमण के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं।
भारत-चिली मुक्त व्यापार समझौता अंतिम चरण में
सरकारी अधिकारी ने बताया कि भारत और चिली के बीच मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) पर चल रही वार्ता अब अंतिम चरण में है। इस समझौते से भारत को इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटो और सौर ऊर्जा जैसे क्षेत्रों के लिए आवश्यक महत्वपूर्ण खनिजों तक पहुंच में मदद मिलेगी।
अधिकारी ने कहा, “चिली के साथ वार्ता समापन के करीब है। केंद्रीय बजट के बाद हम इसे तेजी से पूरा करेंगे।” भारत और चिली ने 2006 में एक प्राथमिक व्यापार समझौता लागू किया था। अब दोनों देश इसे व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते में बदलने के लिए बातचीत कर रहे हैं, जिसमें डिजिटल सेवाएं, निवेश प्रोत्साहन, एमएसएमई और प्रमुख खनिज जैसे कई क्षेत्र शामिल किए जाएंगे।