ग्रेटर नोएडा। सेक्टर-150 में बेसमेंट में गिरने से इंजीनियर युवराज मेहता की मौत के बाद जिले में जल सुरक्षा और जन सुरक्षा को लेकर पुलिस कमिश्नरेट ने बड़े कदम उठाए हैं। पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह के निर्देशन में गौतमबुद्धनगर पुलिस कमिश्नरेट ने जिले में छह नई जल पुलिस चौकियों की स्थापना की योजना बनाई है। इसका उद्देश्य यमुना और हिंडन नदी, नहरों, घाटों और जल पर्यटन स्थलों पर आने वाले श्रद्धालुओं और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और आपदा की स्थिति में तेज़ राहत कार्य करना है।

धार्मिक आयोजनों में बढ़ती चुनौती
पुलिस अधिकारियों के अनुसार श्रावण मास की कांवड़ यात्रा, छठ पूजा, दुर्गा पूजा और अन्य धार्मिक आयोजनों के दौरान घाटों पर भारी भीड़ उमड़ती है। ऐसे में जल दुर्घटनाओं, अवैध गतिविधियों और कानून-व्यवस्था से जुड़ी चुनौतियों का खतरा बढ़ जाता है। इन्हीं परिस्थितियों को देखते हुए रणनीतिक स्थानों पर जल पुलिस चौकियों की स्थापना प्रस्तावित की गई है।

नई जल पुलिस चौकियों का विवरण

  • नोएडा जोन: थाना सेक्टर-126 के अंतर्गत ओखला बैराज की पूर्व दिशा में कालिंदी कुंज यमुना पुल के नीचे चौकी।

  • सेंट्रल नोएडा जोन: थाना इकोटेक-3 के कुलेसरा इलाके में हिंडन नदी किनारे चौकी।

  • ग्रेटर नोएडा जोन: चार चौकियां—थाना नॉलेज पार्क (गांव कामबक्शपुर यमुना तटीय क्षेत्र), थाना दादरी (कोट नहर), थाना दनकौर (खेरली नहर पुलिया) और थाना रबूपुरा (ग्राम चंडीगढ़ यमुना नहर)।

आपात स्थिति में त्वरित बचाव कार्य
जल पुलिस चौकियों का मुख्य काम घाटों पर शांति और कानून-व्यवस्था बनाए रखना, भीड़ प्रबंधन, नावों की क्षमता के अनुसार संचालन और आपात स्थिति में तुरंत बचाव करना होगा। इसके लिए स्थानीय नाविकों, गोताखोरों और आपदा मित्रों के साथ समन्वय स्थापित किया जाएगा। प्रत्येक चौकी को आधुनिक उपकरणों और प्रशिक्षित पुलिस बल से लैस किया जाएगा। इसमें रबरयुक्त रेस्क्यू बोट, प्रशिक्षित बोट चालक, सहायक चालक और स्थानीय गोताखोर तैनात होंगे। प्रशिक्षण और वित्तीय सहायता राहत आयुक्त कार्यालय द्वारा प्रदान की जाएगी। आवश्यकता पड़ने पर जनशक्ति बढ़ाई भी जा सकेगी।

युवराज की जान बच सकती थी
यदि जिले में जल चौकी पहले से होती, तो सेक्टर-150 में हुए हादसे में युवराज मेहता की जान बचाई जा सकती थी। वर्तमान में प्रशिक्षित तैराकों की कमी के कारण पुलिस को गांव के निजी गोताखोरों पर निर्भर रहना पड़ता है। साथ ही, एसडीआरएफ और एनडीआरएफ का कार्यालय जिले में न होने के कारण बचाव में देरी होती है। हादसे वाले दिन घने कोहरे और मौसम की स्थिति के कारण राहत टीम समय पर नहीं पहुंच सकी। यदि जल चौकी और तैनात टीम मौजूद होती, तो रेस्क्यू बोट और प्रशिक्षित गोताखोरों के साथ युवराज को समय रहते बचाया जा सकता था।