प्रदेश सरकार ने राज्य कर्मियों के लिए स्थानांतरण नीति में बड़ा बदलाव करते हुए म्यूचुअल यानी आपसी सहमति से तबादले की सुविधा लागू कर दी है। प्रमुख सचिव नियुक्ति एवं कार्मिक एम. देवराज ने मंगलवार को इस संबंध में नया शासनादेश जारी किया। इसके तहत अब 31 मई तक तबादले की प्रक्रिया पूरी की जा सकेगी।

नए आदेश के अनुसार, कर्मचारियों को व्यक्तिगत परिस्थितियों जैसे स्वास्थ्य संबंधी कारण, बच्चों की शिक्षा, या शासकीय सेवा के दौरान मृतक आश्रित बच्चों की देखभाल के मामलों में आपसी सहमति से स्थानांतरण या समायोजन की अनुमति दी जाएगी। यह व्यवस्था तभी लागू होगी जब उस पर कोई प्रशासनिक आपत्ति न हो।

इसके अलावा, पति-पत्नी दोनों के सरकारी सेवा में होने की स्थिति में उन्हें यथासंभव एक ही जिले या स्थान पर तैनात करने का प्रावधान किया गया है। दिव्यांग बच्चों या पूर्णतः आश्रित बच्चों के माता-पिता की तैनाती भी उनके अनुरोध के आधार पर की जा सकेगी। स्थानांतरित कर्मचारियों को निर्धारित समय सीमा में कार्यभार ग्रहण करना अनिवार्य होगा, अन्यथा उन्हें स्वतः कार्यमुक्त माना जाएगा।

चयन वर्ष में बदलाव

सरकार ने भर्ती और पदोन्नति प्रक्रिया के लिए चयन वर्ष की गणना प्रणाली में भी बदलाव किया है। अब चयन वर्ष की गणना 1 जनवरी से 31 दिसंबर तक की जाएगी, जबकि पहले यह अवधि 1 जुलाई से शुरू होती थी।

यह नई व्यवस्था 1 जनवरी 2027 से प्रभावी होगी। प्रमुख सचिव एम. देवराज द्वारा उत्तर प्रदेश लोक सेवा (भर्ती का वर्ष परिभाषा का प्रतिस्थापन) नियमावली-2026 जारी की गई है।

पुरानी व्यवस्था के अनुसार जुलाई 2026 से दिसंबर 2026 तक का चयन वर्ष एक संक्रमणकालीन अवधि के रूप में माना जाएगा। यदि किसी पद के लिए भर्ती प्रक्रिया पहले ही शुरू हो चुकी है या विज्ञापन जारी हो चुका है, तो वह प्रक्रिया पुराने नियमों के तहत ही पूरी की जाएगी।

पीसीएस-जे से एचजेएस में बदलाव

सरकार ने न्यायिक सेवाओं में भी अहम संशोधन करते हुए पीसीएस-जे परीक्षा उत्तीर्ण अभ्यर्थियों को अब उच्चतर न्यायिक सेवा (HJS) के लिए पात्र बना दिया है।

नई अधिसूचना के अनुसार, पीसीएस-जे अभ्यर्थियों को आवेदन के लिए नौकरी या वकालत मिलाकर कम से कम सात वर्ष का अनुभव होना आवश्यक होगा। इसके साथ ही उत्तर प्रदेश उच्चतर न्यायिक सेवा (उन्नीसवां संशोधन) नियमावली-2026 भी लागू कर दी गई है।

अब सरकारी वकील और अभियोजक भी इस श्रेणी में शामिल होंगे, बशर्ते उन्होंने आवेदन से पहले लगातार सात वर्ष या उससे अधिक की प्रैक्टिस पूरी की हो।

सेवारत और पूर्व न्यायिक अधिकारियों को आवेदन उच्च न्यायालय के महानिबंधक के माध्यम से प्रस्तुत करना होगा। साथ ही, सभी अभ्यर्थियों को अच्छे चरित्र प्रमाण पत्र भी अनिवार्य रूप से प्रस्तुत करने होंगे।